अमर उजाला ब्यूरो
रतिया।
श्री अजीतसर गुरुद्वारा के पूर्व सेवादार इंद्रजीत सिंह द्वारा सरबत खालसा पंथ के जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल के समक्ष गुरुद्वारा की प्रबंधक कमेटी पर मर्यादा न रखने के लगाए गए आरोपों की जांच के लिए दादूवाल सोमवार को गुरुद्वारे में पहुंचे। प्रशासन द्वारा विवाद की आशंका के चलते गुरुद्वारा परिसर को पुलिस छावनी में तबदील कर दिया।
प्रबंधक कमेटी ने की थी कब्जे की शिकायत
प्रबंधक कमेटी ने प्रशासन के समक्ष शिकायत की थी कि उक्त लोग गुरुद्वारे पर कब्जा कर सकते हैं। इस विवादित मामले को लेकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र मेहता और उप पुलिस अधीक्षक रविंद्र तोमर के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। इसके अलावा थाना प्रभारी यादविंद्र सिंह व शहरी चौकी इंचार्ज ओमप्रकाश की देखरेख में ही पुलिस की टुकड़ियां तैनात कर दी। इसके साथ-साथ अलग-अलग स्थानों पर 3 नाके लगा दिए और अश्रु गैस व अन्य हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों के अलावा महिला पुलिसकर्मी न केवल गुरुद्वारे में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर नजर रख रहे थे, बल्कि सभी वाहनों की तलाशी भी ली जा रही थी और इसके साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की वीडियोग्राफी भी की जा रही थी।
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समर्थकों को नाके पर रोका
बताया जाता है कि दादूवाल के आने से पहले जब एक जिप्सी पर सवार होकर उनके समर्थक गुरुद्वारे की तरफ आ रहे थे तो उस जिप्सी को ही हांसपुर कैंचियों के नाके पर रोक लिया और किसी को भी आगे नहीं जाने दिया। बाद में थाना प्रभारी यादविंद्र सिंह ने समर्थकों के पहचान पत्र देखे और अपनी देखरेख में ही गुरुद्वारा में लेकर पहुंचे, जबकि अन्य समर्थकों को वापस भेज दिया। बताया जाता है कि जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल जब अपने समर्थकों सहित 2 गाड़ियों में रतिया में पहुंचे तो सर्वप्रथम उन्हें हांसपुर कैंचियों पर रोका गया और उनसे पहचान पत्र व नाम पता दर्ज करवाने के लिए कहा गया तो उन्होंने काफी ऐतराज किया। जब जत्थेदार की गाड़ी व सहयोगी की गाड़ी को गुरुद्वारा के मुख्य गेट पर लाया गया तो जहां पुलिस उपरोक्त गाड़ी को गुरुद्वारे से बाहर खड़ा करने का फरमान जारी कर रही थी, वहीं जत्थेदार व उनके समर्थक वाहन सहित गुरुद्वारे में जाने की बात पर अड़े हुए थे। काफी नोंकझोंक के पश्चात ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने उनके समक्ष गाड़ी की तलाशी के बाद ही अंदर प्रवेश की बात कही। इस दौरान प्रवेश करते ही जत्थेदार ने परिसर के अंदर नंगे सिर खड़े अधिकारी को मर्यादा का पाठ पढ़ा दिया। इस मामले को लेकर परिसर में ही पंचायत हुई तो इस दौरान जत्थेदार के समक्ष गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार बलवीर सिंह के अलावा तेजिन्द्र सिंह औजला, बलदेव सिंह खालसा, पूर्व सरपंच जंगीर सिंह, चेयरमैन श्याम कंबोज, बिकर सिंह हड़ौली, इकबाल सिंह, हरविंद्र औजला, राजविन्द्र चहल, बलविंद्र सिंह भोला आदि ने अपना पक्ष रखा और पूरे कार्य का उल्लेख किया।
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पंचायत में सुनाया जाएगा फैसला
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी पूर्व सेवादार गुरुद्वारा पर कब्जा करने की नीयत से गुरुद्वारा में बेअदबी कर चुका है और यह मामला सितंबर 2016 में पुलिस थाने में भी पहुंच चुका है। तर्क-वितर्क सुनने के पश्चात जत्थेदार ने कहा कि पंथ की रक्षा को लेकर जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उसके दायित्व के लिए ही वह गुरुद्वारे में आए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा की मर्यादा को देखकर वह पूरी तरह प्रभावित हैं, लेकिन जो उनके समक्ष शिकायत आई है उनका तर्क निकालना भी उनके लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों को सुन लिया गया है और शीघ्र ही इस विवाद पर शांतिमय माहौल बनाने के लिए पंचायत में ही फैसला सुनाया जाएगा।