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स्कूल से नाम कटने से खफा 12वीं कक्षा की छात्रा ने नब्ज काटकर आत्महत्या का किया प्रयास

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद।
स्कूल से नाम कटने से खफा होकर शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 12वीं कक्षा की छात्रा ने घर में ब्लेड से हाथ की नस काट ली। उसे परिजनों ने आनन-फानन में उपचार के लिए फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने बच्ची का नाम काट दिया था और उसके कक्षा इंचार्ज ने उसको स्कूली छात्राओं के सामने अपमानित किया। मामले की सूचना पाकर बीईओ कुलदीप सिहाग ने स्कूल में पहुंचकर मामले की जांच की। बीईओ ने छात्रा को भी स्कूल में बुला लिया और दोबारा से उसका नाम स्कूल में लिखवा दिया गया है। बीईओ ने बताया कि अब छात्रा के माता-पिता भी इस बात से सहमत हैं। वहीं प्राध्यापक का कहना है कि बच्ची कई दिनों से स्कूल से गैर हाजिर थी और नियमों के अनुसार उसका नाम काटा गया था। उन्होंने केवल उसके माता-पिता को स्कूल भेजने की बात कही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक बस्ती निवासी शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 12वीं में पढ़ती है। बताया गया है कि कुछ दिनों से वह स्कूल नहीं जा पाई थी। मंगलवार को जब वह स्कूल गई तो कक्षा इंचार्ज की बात पर वह नाराज हो गई। बताया गया है कि घर पर आकर उसने अपने हाथ पर ब्लेड मार लिया। जिससे उसका खून बहने लगा और परिजनों ने उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। छात्रा की मां ने बताया कि उसकी बेटी कई दिनों से स्कूल नहीं गई थी। मंगलवार को जब वह स्कूल गई तो आरोप है कि स्कूल के प्राध्यापक रामदास उसकी बेटी से बदतमीजी से पेश आया। उसने भरी कक्षा में बेटी को धमकाया और उसके नाम काटने की भी सूचना दी। जिससे व्यथित होकर जब उसकी बेटी घर आई तो उसने परेशान होकर अपने हाथ पर ब्लेड मार लिया, जिससे उसके शरीर से खून बहने लगा। उन्होंने तुरंत उसे उपचार के लिए फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया।
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मैंने केवल माता-पिता को बुलाने की बात कही थी: रामदास
इस बारे में प्राध्यापक रामदास ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बच्ची पहले भी स्कूल से गैर हाजिर रही थी। तब भी उसका स्कूल से नाम कट गया था। इसके बाद उसके परिजनों के आग्रह पर उसका दोबारा नाम लिख दिया गया। अब भी यह बच्ची करीब 15 दिनों से स्कूल से गैर हाजिर थी। हालांकि नियमों के आधार पर 10 दिन गैर हाजिर रहने पर बच्चे का नाम काट दिया जाता है, लेकिन उसे 5 दिन और दिए गए थे। मंगलवार को जब वह स्कूल आई मैंने सिर्फ उसे अपने माता-पिता को स्कूल भेजने के लिए कहा था। इसके अलावा उससे कोई बात नहीं हुई थी। चूंकि दोबारा छात्रा का नाम स्कूल से कटा था, तो उसके माता-पिता से बातचीत करनी आवश्यक थी। बच्ची ने यह कदम क्यों उठाया यह मुझे भी समझ में नहीं आ रहा।
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दोबारा लिखवा दिया गया है नाम: बीईओ
बीईओ कुलदीप सिहाग ने बताया कि बच्ची के हाथ काटने की सूचना के बाद वह जांच के लिए स्कूल गए थे। यहां पर स्टाफ ने इस मामले में प्राध्यापक की गलती ना ही होनी बताई। बच्ची व उसकी माता को भी स्कूल में बुलाया गया, जहां उनसे प्रार्थना पत्र लेकर छात्रा का दोबारा नाम लिख दिया गया है। मेरे सामने बच्ची व उसकी मां ने भी प्राध्यापक की कोई शिकायत नहीं की और वह दोबारा नाम लिखे जाने से संतुष्ट होकर स्कूल से चली गई थी।
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