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जिले में अव्वल रहीं बेटियां, आईपीएस, डॉक्टर, सीएफए बनकर पूरा करना चाहती है सपना

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बुधवार दोपहर को दसवीं का परीक्षा परिणाम भी घोषित कर दिया गया। दसवीं में भी जिले के चार स्थानों पर बेटियां आगे रही हैं। परिणाम घोषित होने के बाद छात्राओं ने अपने अंजाम में खुशी का इजहार किया। कहीं टॉपर को कंधे पर उठाकर तो कहीं उसके साथ सेल्फी लेकर तो कहीं उछलकर खुशी जाहिर की गई। भट्टू के मदर टैरेसा कान्वेंट स्कूल की छात्रा तमन्या ने 500 में से 493 अंक लेकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। क्रिसेंट स्कूल की छात्रा कशिश जिंदल ने 492 अंक लेकर जिले में दूसरा स्थान पाया है। टोहाना के डीएवी स्कूल की छात्रा रंशु ने 489 अंक लेकर जिला में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा पॉयनियर स्कूल की छात्रा सिमरन बिश्नोई ने 488 अंक लेकर जिला में चौथा स्थान पाया है। टॉपर छात्रों का कहना है कि उनका सपना है कि डॉक्टर, आईपीएस, वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।
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पहले डॉक्टर बनूंगी फिर बनूंगी आईपीएस : तमन्या
फतेहाबाद। भट्टूकलां के मदर टैरेसा कान्वेंट स्कूल की छात्रा तमन्या पुत्री श्यामसुंदर ने 500 में से 493 (98.6 प्रतिशत )अंक लेकर जिला में पहला स्थान पाया है। तमन्या के पिता श्यामसुंदर वीएलडीए हैं। तमन्या का कहना है कि उसने स्कूल के बाद चार से पांच घंटे पढ़ाई की। मोबाइल का प्रयोग सिर्फ स्कूल से संबंधित काम प्रयोग करने के लिए किया है। तमन्या का कहना है कि वह पहले डॉक्टर बनना चाहती है क्यों ये मम्मी-पापा का सपना है। इसके बाद वह खुद का सपना आईपीएस बनकर पूरा करेगी। तमन्या का कहना है कि उसने मैथ और हिंदी में 100 में से 100 अंक लिए हैं।
भाई सीए तो मैं बनूंगी सीएफए : कशिश जिंदल
क्रिसेंट स्कूल की छात्रा कशिश जिंदल ने 492 अंक लेकर जिला में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। पिता संजय जिंदल का ट्रंक हाउस का बिजनेस है। कशिश का कहना है कि वह सीएफए बनना चाहती है उसे ये सपना अपने भाई से मिला है जो कि सीए है। उसने स्कूल के बाद आठ घंटे पढ़कर इस कामयाबी को हासिल किया है। मोबाइल भी उसे अब दसवीं की परीक्षा देने के बाद मिला है।
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वैज्ञानिक बनना मेरा सपना : रंशु
टोहाना के डीएवी स्कूल की छात्रा रंशु ने 489 अंक लिए हैं। रंशु जिले मे तीसरे स्थान पर रही है। रंशु का कहना है कि वह वैज्ञानिक बनना चाहती है और इस सपने को पूरा करके दिखाएगी। रंशु का कहना है कि उसकी कामयाबी के पीछे स्कूल स्टाफ के अलावा मां-बाप का योगदान रहा है। पिता योगेश शर्मा बैंक में क्लर्क हैं तो मां गांव पिरथला के सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। मां ने स्कूल के बाद पढ़ाने में समय दिया है और इसी की बदौलत कामयाबी मिली है।
बचपन से सफेद कोट पहने का सपना देखा : सिमरन बिश्नोई
पॉयनियर स्कूल की छात्रा सिमरन बिश्रोई ने 488 अंक लेकर जिला में चौथा स्थान पाया है। सिमरन का कहना है कि उसने स्कूल के बाद चार से पांच घंटे रोजाना पढ़ाई की। पिता किसान है लेकिन उन्होंने पढ़ाई को लेकर बहुत योगदान दिया। उसका सपना है कि वह डॉक्टर बने। बचपन में ही सफेद कोट पहनने का सपना देखा था और इसे पूरा करके दिखाएगी। परिवार में तीन बेटियों है डॉक्टर है और वह भी इस सपने को पूरा करेगी।
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