फतेहाबाद। शिक्षा विभाग की तरफ से रविवार को जिले में उल्लास कार्यक्रम के तहत निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए परीक्षा ली गई। ये परीक्षा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के तहत ली गई। इस परीक्षा को लेकर जिले में 288 केंद्र बनाए गए थे।
परीक्षा में जिले में 6,606 निरक्षर शामिल हुए। रविवार को हुई परीक्षा में गांव शेखुपुर दड़ोली की 102 वर्षीय चिडि़या देवी और गांव ढिंगसरा के 92 वर्षीय बीरबल भी शामिल हुए। बीरबल ने परीक्षा देने के बाद कहा कि सौ मेह 100 आई। परीक्षा को लेकर बीरबल काफी उत्साहित दिखे।पिछले साल सितंबर माह में हुई परीक्षा में गांव अहलीसदर के 102 वर्षीय चंबाराम शामिल हुए थे।
उल्लास कार्यक्रम के तहत शिक्षा विभाग ने दूसरे चरण में जिले को 30 हजार निरक्षरों को ढूंढकर साक्षर बनाने का लक्ष्य दिया था। विभाग की तरफ से किए गए सर्वे में 13,700 निरक्षर मिले। इन्हें पढ़ाने के लिए परिवार के ही पांचवीं कक्षा से ज्यादा पढ़े स्वयंसेवी नियुक्त किए गए। इसके बाद अब रविवार को इनकी प्रारंभिक परीक्षा ली गई। जिसमें लर्नर के लिए सामान्य पाठ्यक्रम शामिल रहा। हिंदी का अक्षर ज्ञान, गणित में संख्याओं का ज्ञान, जोड़-घटा आदि को शामिल किया गया।
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102 साल की चिडि़या देवी बोली, पहले नहीं था शिक्षा की तरफ ध्यान
गांव शेखुपुर दड़ौली निवासी 102 वर्षीय चिडि़या देवी की परीक्षा घर जाकर ली गई। परीक्षा को लेकर चिडि़या देवी उत्साहित दिखी और कहा कि पहले शिक्षा की तरफ ध्यान नहीं होता था और महिलाओं को घर के काम तक ही सीमित रखा जाता था। पोते संदीप ने बताया कि दादी को पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर रही और परिवार के सदस्यों ने ही पढ़ाया और अब खुद भी परीक्षा दी है।
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सर्वे में ये मिले है निरक्षर
खंड परीक्षा देने पहुंचे
टोहाना 1166
भूना 871
जाखल 247
फतेहाबाद 1822
रतिया 1300
भट्टूकलां 1200
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जिले में उल्लास कार्यक्रम के तहत 6,606 निरक्षरों ने परीक्षा दी है। परीक्षा पास होने के बाद इन्हें शैक्षणिक प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। अब ये निरक्षर नहीं कहलाएंगे। विभाग के नियमों के अनुसार ही परीक्षा ली गई है।
- पवन सागर, जिला संयोजक, उल्लास कार्यक्रम