अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश के चौकीदारों एवं सफाई कर्मचारियों को पक्का कर उन्हें 15 हजार न्यूनतम वेतन दिया जाए और अगर किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मौत होती है तो उसके परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा व सरकारी नौकरी का भी प्रावधान किया जाए।
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा रविवार को फतेहाबाद की सब्जी मंडी में आयोजित हिसार जोन की दलित पंचायत को संबोधित कर रहे थे। हुड्डा ने सरकार और इनेलो पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल और इनेलो नेताओं को सपने में भी हुड्डा दिखाई देता है। इस दलित पंचायत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में प्रदेशभर के कांग्रेस नेताओं व विधायकों ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमले बोले, वहीं हुड्डा को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाने की मांग भी उठाई। उन्होंने पंजाब कांग्रेस के 'कैप्टन लाओ-पंजाब बचाओ’ के नारे की तर्ज पर 'हुड्डा लाओ-हरियाणा बचाओ’ का नारा भी दलित पंचायत के मंच से दिया। इस मौके पर पूर्व सीएम के बेटे और रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी मौजूद रहे। इससे पहले सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने फतेहाबाद पहुंचने पर हुड्डा सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया।
दलित पंचायत में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर प्रदेश के भूमिहीन दलित समाज के कर्जे माफ किए जाएंगे और उन्हें नि:शुल्क बिजली दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 3 लाख 92 लोगों को बीपीएल कोटे से सौ-सौ गज के प्लाट और 91 हजार प्रति प्लाट की अनुदान राशि भी दी थी, जिसे भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। हुड्डा ने आरोप लगाया कि अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में बीजेपी सरकार ने किसी भी गरीब या दलित को प्लाट नहीं दिया। कांग्रेस सरकार के दौरान 13 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती की थी, जिन्हें 81 सौ रुपयेे प्रति माह वेतन मिलता था। उन्होंने वादा किया कि अगर उनकी सरकार दोबारा आती है तो सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह 15 हजार रुपये की जाएगी।
पूर्व सीएम हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सरपंचों को धमकी दी है कि अगर उनके गांव में कोई किसान पराली जलाता पाया गया तो उन्हें सस्पैंड कर दिया जाएगा, जबकि खुद मुख्यमंत्री ने तीन बार प्रदेश को जलवा दिया। अब खुद को सस्पैंड क्यों नहीं करते। हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में दलितों की आबादी 19 फीसदी है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बजट में दलितों के लिए 20 फीसदी बजट का प्रावधान किया था। हुड्डा ने ये भी कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान 15 कल्याणकारी योजनाएं लागू की थीं, जिसे बीजेपी सरकार ने आते ही रद्द कर दिया।
उन्होंने दलित पंचायत के संयोजक विधायक उदयभान को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा की गई मांगों को सत्ता में आते ही पूरा करेंगे। हुड्डा ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उनकी अपनी विधायक संतोष का मामला सबके सामने है जबकि कांग्रेसी विधायक गीता भुक्कल व शकुंतला खटक की जान को खतरा है। विधायक खटक की तो गाड़ी ही चोरी हो चुकी है। अब तक 39 हजार से 60 हजार दलितों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश में 9 लाख दलितों को प्रतिवर्ष कांग्रेस राज में नौकरियां मिली थीं, जबकि इस सरकार में महज 8 हजार दलितों को ही नौकरी मिली है। दीपेंद्र हुड्डा ने नोटबंदी और जीएसटी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक असर दलितों पर पड़ा है। सांसद हुड्डा ने कहा कि देश में उत्पादन कम हो गया है और चाइना से माल आ रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के दायरे में कीटनाशक, ट्रैक्टर और खाद को भी कर दिया है। इस दलित पंचायत को पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मौलाना, दलित पंचायत के संयोजक उदयभान, विधायक जयबीर वाल्मीकि, पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व मंत्री परमवीर सिंह, जरनैल सिंह, संपत सिंह, गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, पूर्व ओएसडी केवी सिंह, भरत सिंह बैनीवाल सहित, सांसद शादीलाल बतरा, जिला पार्षद बीबो इंदौरा सहित अनेक कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमले बोले।