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क्लासिकल डांस के कद्रदान कम नहीं हुए

Sat, 26 Oct 2013 11:16 PM IST
अमर उजाला फरीदाबाद
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फ्यूजन, हिप-हॉप और फ्री स्टाइल डांस के इस दौर में भी क्लासिकल नृत्य के कद्रदान कम नहीं हुए हैं। भारतीय संस्कृति को दर्शाती पारंपरिक नृत्य कलाएं आज भी अपनी एक खास जगह बनाए हुए हैं। अमर उजाला से बातचीत में यह बात मशहूर कथक नृत्यांगना बहनें नलिनी, कमलिनी ने कही।
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वे शनिवार को सेक्टर-12 स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्वर मंदिर म्युजिक कॉलेज के वार्षिक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि वह लगभग 30 साल से देश-विदेश में कथक का विस्तार कर रही हैं।

नलिनी ने बताया कि विदेशों में भारतीय नृत्य कलाओं की बहुत प्रसिद्धि है। लोग वहां इन कलाओं के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। कुछ समय पूर्व वह 15 दिन के यूरोप दौरे पर गई थीं। जहां उन्होंने 128 बार नृत्य किया। इसमें भीड़ देखते ही बनती थी।
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कथक का पूरक हाव-भाव होता है
नलिनी ने बताया कि कोई भी नृत्य बिना हाव-भाव के पूरा नहीं हो सकता। चाहे पूरे शरीर की मुद्राएं हों या चेहरे की। कथक में इन सभी को विशेष जगह दी गई है। आज जो भी नृत्य कलाएं व रूप हैं उसमें कथक की झलक देखने को मिलती है। कथक में परंपरा और संस्कृति का समावेश है। जिस कारण इसकी अहमियत कभी खत्म नहीं हो सकती।

व्यक्तित्व में लाती है सकारात्मक बदलाव
कमलिनी ने बताया कि लोग आजकल सीडी से नृत्य सीखने का प्रयास करते हैं लेकिन बिना गुरु के सिखाए कोई भी व्यक्ति कथक की बारीकियों को नहीं सीख सकता। यह कला व्यक्तित्व में भी सकारात्मक बदलाव लाती है।

नृत्य पर झूमे लोग
फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित कन्वेशन सेंटर में स्वर मंदिर म्युजिक कॉलेज के वार्षिक समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति से संबंधित नृत्य पेश करके लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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