फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेकार चीज से मिला नाम और दाम

Tue, 05 Feb 2013 05:30 AM IST
Faridabad
विज्ञापन
विज्ञापन
सूरजकुंड (फरीदाबाद)। कलाकार अपनी कल्पना की उड़ान को हकीकत में किस हद तक उतार सकता है इसकी एक मिसाल देखिए। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले यूनुस खान ने गेहूं के डंठल से एक ऐसी कला विकसित कर दी है जिसे देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
विज्ञापन

पेंटिंग के शौकीन खान 35 साल से गेहूं के डंठल से पेंटिंग बना रहे हैं। खान बताते हैं कि उनका कोई गुरू नहीं है। अपनी कला है इसलिए कोई प्रतियोगिता नहीं है। बस अपनी कल्पना की उड़ान और उसे साकार करने की साधना ही इसकी लागत है।
कच्चे माल की कोई लागत नहीं है। क्योंकि गेहूं की कटाई के समय बड़ी मात्रा में यह उपलब्ध रहता है। बस अच्छे डंठल सहेजकर रखने पड़ते हैं। यानी बेकार के डंठलों से उन्होंने कला की एक नई दुनिया जीवंत कर रखी है। उनकी पूरी कला कबाड़ से जुगाड़ जैसी है। डंठलों से बनीं कलाकृतियां सोने सी दमकती हैं। जैसे-जैसे पुरानी होती हैं सुनहरी होती जाती हैं।
विज्ञापन

डंठलों से कोई पेंटिंग बनाने में दो दिन से दो माह तक का वक्त लग जाता है। वह काले साटन कपड़े पर खाका खींचकर उस पर बहुत बारीकी से डंठल चिपकाते हैं। यूनुस ने अपनी पत्नी सादिका यूनुस को भी यह कला सिखा दी है। जो आजकल तराई की थारु महिलाओं को यह कला सिखाकर उन्हें स्वरोजगार की तरफ प्रेरित कर रही हैं।
उनके इस हुनर को सिडनी से लेकर अमेरिका और दुबई तक में पसंद किया गया है। सीमा सुरक्षा बल ने भी इसे सलाम करते हुए अपनी प्रदर्शनी में लगाया। पति-पत्नी को उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया है।
उन्होंने देवी-देवताओं की कलाकृतियां, धर्मों के निशान, ताजमहल एवं प्राकृतिक दृश्य प्रमुख रूप से बनाए हैं। हाल ही में उन्होंने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की प्रतिकृति तैयार की है। दाम दो सौ से लेकर 20 हजार रुपये तक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें