फरीदाबाद। नगर निगम किस तरह अनियमितता के दलदल में फंसा हुआ है इसका एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। सरकार ने नगर निगम में बगैर योग्यता के बड़े पदों पर बैठे करीब 70 लोगों को उनके वर्तमान पद से हटाकर ‘औकात’ में ला दिया है।
नगर निगम में लंबे समय से पदों की रेबड़ी बांटने का गड़बड़झाला चल रहा था, जिसमें मंत्रियों, विधायकों एवं बड़े अधिकारियों की सिफारिश पर किसी को कुछ भी बना दिया गया। कोई बेलदार राताेंरात जूनियर इंजीनियर (जेई) बन गया तो कोई सफाई कर्मी क्लर्क। वेतन बेलदार, सफाईकर्मी एवं माली का रहा और ओहदा बड़ा हो गया। कुर्सी बड़ी मिल गई। कुर्सी के इस खेल में वह लोग पिसने लगे जो दो-दो दशक से ठेके पर काम करने के बावजूद अब तक पक्के नहीं हुए।
निगम सूत्रों के अनुसार, एक गोपनीय शिकायत पर मुख्य सचिव की ओर से इस तरह की गलती को सुधारने के आदेश दिए गए, जिसके आधार पर योग्यता से अधिक ऊंचे पदों पर बैठे करीब 70 लोगों को अपने पुराने पदों पर भेज दिया है। यानी वह जिस पद के योग्य हैं अब उसी पर रहेंगे।
म्युनिसिपल एंप्लायज फेडरेशन के महासचिव रतनलाल रोहिल्ला का कहना है कि नगर निगम में लगातार सेवानियमों का उल्लंघन किया गया, जिन लोगों ने गलत तरीके से कर्मचारियों को उनके मूल पद से ऊंचे पदों का चार्ज सौंपा सबसे बड़े गुनाहगार वे हैं। सरकार इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय करे।
-राज्य सरकार के निर्देश पर ही 40 ठेकाकर्मियों की छुट्टी कर दी गई है। ये क्लर्क एवं कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे थे। लेकिन इनका काम संतोषजनक नहीं था। छह माह का पहला कांट्रैक्ट पूरा होने के 15 दिन पहले ही इन्हें हटा दिया गया।
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-दो बेलदारों को निगम प्रशासन ने जेई बना दिया था। वह वेतन तो बेलदार का ले रहे थे (ऑन पे स्केल चार्ज) लेकिन काम जेई वाला कर रहे थे। लेकिन अब वे फिर बेलदार बन गए।
-इसी तरह करीब एक-एक दर्जन माली एवं सफाईकर्मियों को क्लर्क बना दिया गया था, जिन्हें अब फिर से पुराना काम दे दिया गया है।
-निगम सूत्रों का कहना है कि यहां कुछ और लोग ऐसे हैं जो वास्तविक पद से अधिक ऊपर का काम कर रहे हैं। अभी भी एक टैक्स अधिकारी प्रस्थापना शाखा(एचआर) का काम देख रहा है।
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बिना अनुमति चिपके रहते हैं कुर्सी से
यहां कुर्सी का चक्कर ऐसा है कि नगर निगम में सेवानिवृत्ति के बाद बिना सरकार की अनुमति दो अधिकारी लंबे समय तक काम करते रहे। इसमें से एक ओल्ड फरीदाबाद के टैक्स डिवीजन का अधिकारी एवं दूसरा फायर ऑफिसर था।
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कोई पद खाली होता था और उस पर कोई उससे नीचे का कर्मचारी यह कहता था कि वह अपने मूल पद के वेतन पर काम कर लेगा तो उसे चार्ज दे दिया जाता था। क्योंकि इससे निगम का कोई घाटा नहीं होता था। लेकिन, अब सरकार ने कह दिया है कि यह शॉर्टकट बंद किया जाए। यदि कोई योग्य है तो उसे नियमत: पदोन्नत किया जाए।
-एसएस अरोड़ा, प्रशासनिक अधिकारी।
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अपने चहेतों को पुराने वेतनमान पर ऊंचा पद इसलिए दिया जाता है ताकि वे उस कुर्सी का दुरुपयोग कर लूट खसोट करें। अपना व अपने आकाओं का पेट भरें। शुक्र है कि सरकार को यह मिलीभगत समझ में तो आई।
-विनोद अग्रवाल, सूचना अधिकार कार्यकर्ता
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नगर निगम में बैक डोर से जितनी भी भर्तियां की गईं, प्रमोशन किए गए उनमें आरक्षण का पालन नहीं किया गया। पिछड़ी व अनुसूचित जाति के लोगों की अनदेखी की गई है। इस बारे में आरटीआई डालकर जानकारी मांगी गई है। यह मसला भी सरकार के पास जाएगा।
-ओपी धामा, सूचना अधिकार कार्यकर्ता।