हरियाणा में हुक्का बार बंद होने के बाद अब इलेक्ट्रानिक सिगरेट का खतरा पैदा हो गया है। युवा इलेक्ट्रानिक सिगरेट का शिकार हो रहे हैं, जो कि आम सिगरेट से दस गुना ज्यादा घातक है।
जर्मनी में हुई अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हरियाणा के अफसरों ने हुक्का बार बंद करने के मामले में अपने नंबर तो बना लिए, लेकिन इलेक्ट्रानिक सिगरेट पर लगाम नहीं कसी जा सकी। यह चिंता सेमिनार में भी जताई गई है।
प्रदेश के बड़े शहरों में इस समय इलेक्ट्रानिक सिगरेट का चलन बढ़ गया है। पंचकूला और गुड़गांव सहित एनसीआर क्षेत्र में इस सिगरेट की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। पिछले दिनों पंचकूला में ही बस अड्डे के सामने से खाद्य व आषुधि प्रशासन विभाग ने पचास के करीब इलेक्ट्रानिक सिगरेट बरामद कर उनका सैंपल भरा है।
अब सिगरेट बनाने वाली इस कंपनी के पते पर अफसरों को भेजकर सैंपल भरवाया जाएगा। जिसके बाद हरियाणा में इलेक्ट्रानिक सिगरेट पर भी पाबंदी लगना तकरीबन तय है।
सेमिनार में अधिकारियों ने यह तर्करखे हैं कि इलेक्ट्रानिक सिगरेट में .5 फीसदी निकोटीन है। यह आम सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है। एक इलेक्ट्रानिक सिगरेट आम छह या सात सिगरेट के बराबर है।
यूरोप परेशान है हुक्का बार से:
इस समय पूरा युरोप हुक्का बार और इलेक्ट्रानिक सिगरेट से परेशान है। वहां पर नशे की यह आदत महामारी के रूप में फैल गई है। जिसके बाद हरियाणा ने उन्हें हुक्का बार पर प्रतिबंध लगाने के तरीकों से अवगत करवाया है।