वहीं, राव दान सिंह हुड्डा के विश्वास पात्र माने जाते हैं। बीते लोकसभा चुनाव में हुड्डा की वजह से हाईकमान ने बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी की जगह उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट दिलवाया। वह भी 1,392 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंस गए हैं। ईडी ने वीरवार को कांग्रेस विधायक राव दान सिंह और उनके परिवार के साथ-साथ एक मेटल फैब्रिकेटिंग कंपनी और उसके प्रमोटरों के परिसरों पर दबिश दी।
इस मामले में उनके बेटे अक्षत का नाम भी आया था। लोकसभा चुनाव में किरण चौधरी व श्रुति चौधरी ने अक्षत के मामले को लोकसभा चुनाव में उछाला था। तीसरे विधायक सुरेंद्र पंवार की गिनती भी हुड्डा के करीबियों में होती है। पंवार ने 2019 में सोनीपत से भाजपा की पूर्व विधायक कविता जैन को हराया था। इसके पहले सुरेंद्र पंवार इनेलो में थे। ईडी ने उनके ठिकानों पर जनवरी में कार्रवाई की थी।
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी ईडी के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ मानेसर में अवैध जमीन अधिग्रहण, पंचकूला में औद्योगिक प्लाट आवंटन घोटाला, एजेएल को प्लाट देने और एम3एम से जुड़े मामले शामिल हैं। पंचकूला में औद्योगिक प्लाट आवंटन घोटाले में ईडी चार्जशीट दायर कर चुकी है, लेकिन सीबीआई ने नहीं की है। मानसेर मामले में सीबीआई की चार्जशीट में हुड्डा का नाम है, मगर ईडी की चार्जशीट अभी नहीं हुई है। एजेएल मामले में भी ईडी चार्जशीट दायर कर चुकी है। वहीं, एम3एम में ईडी ने चार्जशीट अब तक दायर नहीं की है, मगर सीबीआई की एफआईआर में हुड्डा का नाम शामिल है।
चुनाव विश्लेषक प्रमोद शर्मा ने बताया, ईडी ने जो कार्रवाई की है, वह कहीं न कहीं जांच पर आधारित है। लेकिन चुनाव के समय इस तरह की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित दिखती है। इस समय कार्रवाई से सवाल तो उठना तय है। वहीं, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी कहा है कि भाजपा सरकार ईडी, सीबीआई का इस्तेमाल करने की बजाय जनता के सवालों का जवाब दे। केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा के प्रकोष्ठ की तरह काम करती हैं।