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जूनियर एशियन चैंपियन में जीत हासिल कर पहलवान सुजीत ने देश को दिलाया एक और स्वर्ण पदक

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चरखी दादरी। बहरीन के मनामा में आयोजित एशियन अंडर-20 कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की महिला पहलवानों के साथ पुरुष पहलवानों का जलवा भी कायम है। इस चैंपियनशिप में दादरी जिले के इमलोटा निवासी पहलवान सुजीत कलकल ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। गत 15 दिनों में सुजीत कलकल का यह दूसरा अंतरराष्ट्रीय पदक है। उसकी सफलता पर खेल प्रमियों ने बधाई दी है। वहीं, सुजीत ने अपना पदक पिता दयानंद कलकल को समर्पित किया है। सुजीत ने फाइनल मुकाबले में जापान के पहलवान को शिकस्त दी।
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सुजीत के पिता दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत ने एशियन अंडर-20 कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेते हुए 65 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। इससे पहले सुजीत ने पिछले महीने में किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित एशियन अंडर-23 में भारत के नाम एक स्वर्ण पदक किया था। सुजीत के पिता ने बताया कि यह सुजीत की यह दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उसने अपने दांव पेच की छाप छोड़ी। दोनों ही प्रतियोगिता में सुजीत ने शानदार खेलते हुए दो स्वर्ण पदक भारत के नाम किए।
बता दें कि बहरीन में आयोजित स्पर्धा के महिला वर्ग में भारत की टीम अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही जिसमें दादरी की पहलवानों की भागेदारी रही। मूल रूप से निमली निवासी आरजू ने 68 किलो भार वर्ग में व दादरी की रीना ने 55 किलो भारवर्ग में खेलते हुए भारत के नाम क्रमश: एक स्वर्ण पदक व रजत पदक किया।
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ये हैं सुजीत की अब तक की उपलब्धियां -
-2022 में आयोजित एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- 2022 में आयोजित एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- 2022 में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक।
- 2022 में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- 2021 में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक।
साई के अलावा पिता से सीख रहा कुश्ती के गुर
सुजीत के पिता दयानंद कलकल पेशेवर कुश्ती पहलवान रह चुके हैं। वह आर्मी से रिटायर होकर फिलहाल साई सेंटर में कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुजीत को कुश्ती खेलने की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली थी। सुजीत के पिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक न जीत पाने का मलाल था, लेकिन उनके बेटे ने पदक जीतकर इस टीस को दूर किया।
- ओलंपिक में पदक लाना है लक्ष्य
दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत का लक्ष्य सिर्फ ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वो इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहा है और गत दो स्पर्धाओं में किए गए प्रदर्शन से इसका पता लगता है। वहीं, सुजीत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद वो और अधिक मेहनत करेगा।
वर्ल्ड रैंकिग टूर्नामेंट में अब निभाएगा सहभागिता -
सुजीत के पिता दयानंद कलकल ने बताया कि इस जीत के साथ सुजीत बहुत खुश है। इसके बाद सुजीत टयूनिशिया में 17 जुलाई से 20 जुलाई तक सीनियर लेवल की प्रतियोगिता के अंदर सहभागिता निभाएगा। इसके बाद सीनियर स्तर पर पौलेंड में 21 से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में भी वो भाग लेगा।
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