चरखी दादरी के पार्क में टूटे पड़े झूले।
चरखी दादरी। शहरवासियों को शुद्ध हवा और मानसिक सुकून देने के उद्देश्य से बनाए गए चार प्रमुख मिनी पार्क आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। देखरेख के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के चलते इन पार्कों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। भले ही नगर परिषद की ओर से दो पार्कों में ओपन जिम के उपकरण लगवाए गए है लेकिन पार्कों के टूटे पड़े झूले हादसों को निमंत्रण दे रहे है। वहीं सूखी घास बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ाने का काम कर रही है।
एक समय था जब इन मिनी पार्कों में सुबह-शाम पैर रखने की जगह नहीं होती थी। बच्चे झूलों पर खेलते थे और बुजुर्ग हरी घास पर टहलते थे लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है। पार्कों में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले पूरी तरह टूट चुके हैं। लोहे के एंगल नुकीले होकर बाहर निकले हुए हैं जिससे यहां खेलने आने वाले बच्चों के लिए हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है। खराब हो चुके झूलों के कारण अब माता-पिता बच्चों को पार्क में लाने से कतराने लगे हैं। इसके अलावा नियमित रूप से पानी न मिलने और मालियों की कमी के कारण पार्कों की हरी-भरी घास अब पूरी तरह सूख चुकी है। पार्क के मैदान अब धूल भरे मैदानों में तब्दील हो रहे हैं।
फूलदार पौधों का नामोनिशान नहीं, छाई वीरानी
मटका पार्क और तिकोना पार्क की खूबसूरती कभी यहां के रंग-बिरंगे फूल और पौधे हुआ करते थे लेकिन आज इन दोनों ही पार्कों में फूलदार पौधे ढूंढने से भी नहीं मिलते। पौधों के नाम पर केवल सूखी झाड़ियां बची हैं। पौधों की सिंचाई के लिए न तो पानी की उचित व्यवस्था है और न ही पौधों की छंटाई के लिए कोई कर्मचारी तैनात किया गया है।
सरस्वती और मंगल पार्क में बनाई गई है ओपन जिम
नगर परिषद की ओर से भले ही सरस्वती पार्क और मंगल पार्क में ओपन जिम के उपकरण लगवाए गए है लेकिन परिसर में टूटे पड़े झूलों से बच्चों को दूरी बना कर रखनी पड़ती है। वहीं पार्कों में खेल रहे बच्चों पर विशेष निगरानी रखनी पड़ती है ताकि किसी छोटे बच्चे के साथ हादसा नहीं हो जाए।
वर्सन:
शहर के सभी मिनी पार्कों में टूटे हुए झूलों को प्राथमिकता से ठीक करवाया जाएगा वहीं सभी पार्कों में फूलदार पौधे व हरी घास लगवाने का काम जल्दी ही करवाया जाएगा।- साैहार्द शर्मा, कनिष्ठ अभियंता, नगर परिषद।