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चुनाव की आहट के साथ ही गर्माई शहर की सरकार की राजनीति

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चरखी दादरी। नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही शहर की सरकार की राजनीति गर्मा गई है। शहर की सरकार में भागेदारी के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों में भी हलचल बढ़ गई है और कोरोना काल के दौरान सभी प्रकार की गतिविधियों से दूरी बनाए बैठे उम्मीदवार अब लोगों से मिलने-जुलने, उनके पारिवारिक कार्यक्रमों में शरीक होने लगे हैं। शहर में करीब 43 हजार मतदाता 21 पार्षदों का चुनाव करेंगे। इस बार की खास बात यह है कि चेयरमैन के पद के लिए सीधे चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में 43 हजार मतदाता ही चेयरमैन चुनेंगे ना कि 21 पार्षद। इसलिए चेयरमैन पद के लिए भी काफी संख्या में उम्मीदवार तैयारी कर रहे हैं।
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पिछली दफा भाजपा के उम्मीदवार संजय छपारिया चेयरमैन बने थे, मगर इस बार कुर्सी की राह किसी भी उम्मीदवार के लिए आसान नहीं होगी। भाजपा, कांग्रेस, जजपा, इनेलो के अलावा अन्य राजनीतिक दलों को निर्दलीय उम्मीदवार कड़ी टक्कर देंगे। पिछले साल शहर की सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया था। जिसके बाद कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते राजनीतिक गतिविधियां ठंडे बस्ते में रही और नगर परिषद चुनावों को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। मंगलवार को जैसे ही चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने 24 अप्रैल को चुनाव कराने संबंधित सूचना दी तो अचानक से राजनीति गर्मा गई और सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए।
मुद्दे : जनता मांगे सीवर समस्या का समाधान और पर्याप्त स्वच्छ पेयजल -
चरखी दादरी में इस बार भी पिछले कई वर्षों की तरह मूलभूत सुविधाओं की ही मांग है। इनमें सबसे अहम सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान है। ठप सीवरेज व्यवस्था के कारण शहर में बारिश के समय तो हालात बदतर हो जाते हैं और मार्केट तक बंद करनी पड़ती है। कई-कई दिनों तक पानी की निकासी नहीं हो पाती। दिल्ली रोड मुख्य बाजार नजदीक पटियाला बैंक, तिकोना पार्क, एमसी कॉलोनी सहित अनेक क्षेत्रों में सीवर का पानी अभी भी गलियों, सड़कों में जमा है और लोग परेशान हैं। अधिकारियों, नेताओं से गुहार लगाने के अलावा रोष, रोड जाम जैसे कदम तक उठा चुके हैं, मगर समस्या जस की तस बनी हुई है।
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यही हालत पेयजल को लेकर है। जनस्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी के चलते शहर वासियों के लिए पर्याप्त पानी ही नहीं है। दरअसल विभाग के पास पानी स्टोरेज की क्षमता कम है। लीकेज ने पानी का टेस्ट बिगाड़ दिया है। अधिकतर समय तो विभाग जमीनी पानी या बरसाती पानी ही सप्लाई करता है। इसके अलावा चुनाव में कच्ची गलियां, टूटी सड़के, खस्ताहाल सफाई व्यवस्था के साथ ही नगर परिषद का दायरा बढ़ाना भी मुद्दा रहेगा। काफी कालोनियां शहर के बाहरी हिस्से में बसी हैं। शहरी दायरे से बाहर होने के कारण इन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही।
आसान नहीं किसी दल की राह -
हरियाणा की राजनीति की तरह ही चरखी दादरी में भी भाजपा, कांग्रेस, जजपा, इनेलो के बीच ही टक्कर है। मगर इस बार किसी भी दल के लिए राह आसान नहीं होगी। लगभग सभी दल अपने चुनाव चिह्न पर प्रधान पद का उम्मीद्वार उतारने की तैयारी में है। साथ ही विभिन्न संगठनों से जुड़े कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिनका कहना है कि पार्टी ने टिकट दी तो ठीक वरना निर्दलीय लड़ेंगे। ऐसे में इस बार निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में न केवल कड़ी स्पर्धा देंगे, बल्कि वोट तोड़ कर चुनाव को रोचक भी बनाएंगे। चेयरमैन पद पर सीधे चुनाव होने के कारण इस बार इस पद के चुनाव को शहरी क्षेत्र में विधानसभा चुनाव की तरह ही आंका जा रहा है।
21 में से सात वार्ड है महिला आरक्षित -
वार्ड 12 इस बार एससी (शेड्यूल कॉस्ट) वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है, जबकि वार्ड दो, तीन, सात, 16, 18 और 21 से सामान्य वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं। महिला वार्डों की रोटेशन प्रक्रिया के बाद कई वार्डों के समीकरण पिछली बार की तुलना में बदल गए हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण के तहत 21 में से सात वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं। इनमें एक वार्ड एससी वर्ग की महिला के लिए, जबकि छह वार्ड सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हैं। महिला वार्डों की इस रोटेशन प्रक्रिया ने कई पार्षदों का खेल बिगाड़ दिया है। जरनल वर्ग के पुरुष के लिए वार्ड चार, छह, 10 और 19 आरक्षित है। बीसी वर्ग के लिए वार्ड पांच और आठ ही आरक्षित हैं। वार्ड 11 और 14 से एससी वर्ग के पुरुष चुनाव लड़ सकते हैं।
6 साल में बढ़ी शहरी आबादी, युवाओं का रहेगा अहम रोल -
2016 के मुकाबले 2022 में दादरी शहर की आबादी पंद्रह से बीस हजार बढ़ी है। शहरी आबादी इस समय 90 हजार से पार है। शहर में 21 वार्ड हैं, जिनमें से सात महिला आरक्षित हैं। पिछले छह साल में सात से आठ हजार शहरी मतदाता बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में स्पष्ट है कि इस बार के चुनाव में युवा मतदाताओं का अहम रोल रहेगा।
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