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Charkhi Dadri News: हिंसक कुत्ते, बिल्ली और बंदर हर माह 165 लोगों को पहुंचा रहे अस्पताल

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रावलधी बाईपास के समीप गली में घूमते कुत्ते।
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चरखी दादरी। जिले में हिंसक कुत्ते, बंदर और बिल्ली लोगों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं। पिछले दस माह में इनके काटने से 1658 लोग जिले के विभिन्न सरकारी केंद्रों पर उपचार करवाने पहुंचे हैं। इस लिहाज से एक माह के अंदर 165 लोगों को बंदर, कुत्ते और बिल्ली काट रहे हैं। हालांकि इनमें से 70 प्रतिशत लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं।
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जिले में बंदरों, बिल्ली और कुत्तों की बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति से लोग डर के साये में आवागमन कर रहे हैं। जिले में प्रतिदिन की बात करें तो पांच लोगों को बंदर, कुत्ते और बिल्ली अपना शिकार बना रहे हैं। ये हम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कह रहे हैं। जनवरी से अक्तूबर के आंकड़ों की बात करें तो 1658 लोग इन तीनों जानवरों का शिकार बने हैं। ये लोग बिल्ली, बंदर और कुत्ते के काटने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचे। ये आंकड़े बेहद चिंताजनक है जबकि प्रशासन की बंदर और कुत्तों को पकड़ने की कोई योजना नहीं है।
2023 के 10 माह में बंदरों और कुत्तों का शिकार बने लोगों का संवाददाता ने स्वास्थ्य विभाग से डाटा जुटाया तो चौंकाने वाली स्थिति मिली। आंकड़ों पर गौर करें तो 123 लोगों को बिल्लियों ने, 323 को बंदरों ने और 1212 लोगों को कुत्तों ने काटे हैं। अगस्त माह में सर्वाधिक 262 लोग कुत्तों, बंदरों और बिल्ली का शिकार बने हैं।
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- यूं दिया जाता है तीन तरह का उपचार



कार्यवाहक सीएमओ डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि 16 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर कुत्ते या बंदर काटने से घायल मरीजों का उपचार किया जाता है। इनके तहत 3, 7, 14, 28 व 59 दिन के अंतराल पर एंटी रैबीज वैक्सीन दी जाती है। पहले दो स्टेज में तीन और चार वैक्सीन लगाई जाती है जबकि तीसरी स्टेज में उपचार का समय 59 दिन तक हो सकता है।

इन बातों का रखें ख्याल



- कुत्ता या बंदर के काटते ही घाव को साबुन के पानी से तत्काल साफ करें।



- घाव साफ करने के बाद घरेलू उपचार के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।



- घाव पर कपड़ा न बांधे और टांके लगवाने के बजाय इसे खुला छोड़ दें।



- एंटी रैबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लें और विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसे बंद करे।



यूं खतरनाक साबित हो सकती है लापरवाही

डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि कुत्ता या बंदर के काटने पर उपचार न कराने संबंधी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। कई ऐसे केस सामने आए हैं जिनमें रोग रीढ़ की हड्डी तक पहुंचा और इसका असर करीब आठ से 14 साल बाद पता चला। ऐसा एक वाक्या चंडीगढ़ में भी हुआ था।

सरकारी केंद्रों पर 100 रुपये में मिलती है वैक्सीन, बाहर रेट 350 रुपये



सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की बात करे तो वैक्सीन की डोज महज 100 रुपये में मिलती है। ओपीडी या इमरजेंसी कक्ष में पहुंचकर मरीज यह डोज लगवा सकता है। वहीं, बाहर वैक्सीन की एक डोज 350 रुपये में मिलती है। राहत की बात यह है कि फिलहाल विभाग के स्टॉक में पर्याप्त वैक्सीन है। नोडल अधिकारी डॉ. गौरव भारद्वाज ने कहा कि जिसको दूसरी या बाद की डोज लगवानी है वो ओपीडी में लगवाने को ही प्राथमिकता दें। पहली डोज इमरजेंसी कक्ष में लगवा सकते हैं।



जानिये... किस माह कितने लोग बने शिकार

माह- शिकार बने लोग

जनवरी-112
फरवरी-205

मार्च-87
अप्रैल-129

मई-109
जून-71

जुलाई-216
अगस्त-262

सितंबर-246
अक्तूबर-221

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वर्ष 2023 में जनवरी से अक्तूबर तक बंदरों, कुत्तों और बिल्लियों ने 1658 लोगों को अस्पताल पहुंचाया है। सरकारी 16 स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार की सुविधा है। हमारे पास फिलहाल वैक्सीन की 3000 हजार से ज्यादा डोज का स्टॉक है।
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-डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी


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