चरखी दादरी। आजादी का अमृत महोत्सव श्रृंखला के तहत राजकीय महाविद्यालय बिरोहड़ में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के तत्वावधान में महान क्रांतिकारी सुशीला दीदी के 117 वें जन्मदिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं मुख्य वक्ता डॉ. अमरदीप इतिहास विभागाध्यक्ष ने कहा कि सुशीला दीदी ने क्रांतिकारी आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपनी शादी के गहने तक दान कर दिए थे।
प्रो. जितेंद्र ने कहा कि पांच मार्च 1905 में पंजाब में जन्मी सुशीला दीदी के पिता डॉ. करमचंद अंग्रेजों की सेना में मेडिकल अफसर थे और उन्होंने सुशीला को क्रांतिकारी गतिविधियों से रोका तो सुशीला दीदी ने साहसपूर्ण जवाब दिया था कि घर छूटे तो छूटे लेकिन देश को आजादी दिलाए बिना उनके कदम नहीं रुकेंगे। सुशीला की शिक्षा जालंधर कन्या विद्यालय से हुई और उन्हें देशभक्ति की प्रेरणा इसी विद्यालय की प्राचार्य लज्जावती से मिली। काकोरी कांड के क्रांतिकारियों को बचाने के लिए सुशीला दीदी ने मां द्वारा उनकी शादी के लिए रखा गया 10 तोला सोना मुकदमे की पैरवी के लिए दे दिया। कार्यक्रम की संरक्षक एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. अनीता रानी ने कहा कि देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाली वीरांगना सुशीला दीदी स्वाधीनता के पश्चात आर्थिक अभाव व खराब स्वास्थ्य के चलते 13 जनवरी 1963 को इस दुनिया से अलविदा कह गईं। इस अवसर पर जितेंद्र, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. राजपाल गुलिया आदि उपस्थित रहे।