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जीएच में अल्ट्रासाउंड, 3 सीएचसी में एक्स-रे मशीन तीन साल से बंद

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चरखी दादरी। एकतरफ सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना के नए वेरिएंट ऑमिक्रोन से निपटने की तैयारियां पूरी होने का दम भरा जा रहा है तो दूसरी ओर जिले में विशेषज्ञों की कमी 10 से अधिक रिमाइंडर भेजने के बावजूद अब तक दूर नहीं हो पाई है। आलम ये है कि सिविल अस्पताल में पिछले तीन साल से अल्ट्रासाउंड सेवा और इससे लंबी समयावधि से जिले के तीनों सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) पर एक्स-रे सुविधा बंद है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है और वो दूसरे जिला अस्पतालों के चक्कर काटने को विवश हैं। दूसरी ओर जिला स्वास्थ्य विभाग के बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
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जिला अस्पताल में पिछले तीन साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है। मशीन और विशेषज्ञ की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड की ही व्यवस्था कर पाया है, जबकि पुरुष मरीजों को रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल रेफर किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए विभाग ने शहर के निजी केंद्रों से समझौता किया हुआ है। निजी केंद्रों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहले गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से पर्ची बनवाकर निजी केंद्र पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है और अगले दिन अस्पताल में जाकर रिपोर्ट लेनी पड़ रही है। एक दिन में छह किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करना गर्भवती महिलाओं के लिए आसान नहीं है। जिला सिविल अस्पताल पर करीब साढ़े पांच लाख की आबादी निर्भर है। अल्ट्रासाउंड सेवा का प्रावधान पीएचसी और सीएचसी की बजाय केवल सिविल अस्पताल में ही है। नई अल्ट्रासाउंड मशीन मिलने और अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की तैनाती होने पर ही सिविल अस्पताल में यह सेवा शुरू हो पाएगी।
अब अगर ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात करें तो बौंदकलां, झोझूकलां और गोपी स्थित केंद्र पर एक्स-रे सुविधा तक नहीं है। नियमानुसार सीएचसी पर एक्स-रे सेवा होनी चाहिए। सिविल अस्पताल में तो एक्स-रे सुविधा का लाभ मरीजों को मिल रहा है लेकिन इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों पर रेडियोग्राफर व रेडियोलॉजिस्ट समेत मशीन का अभाव होने से यह सेवा बंद है। ऐसे में तीनों सीएचसी से जुड़े गांवों के मरीजों को एक्स-रे करवाने के लिए सिविल अस्पताल की भागदौड़ करनी पड़ रही है। इससे यहां भी वर्कलोड की समस्या बनी है।
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- अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से 36 हजार से अधिक मरीजों को हुईं दिक्कतें
सिविल अस्पताल में जिस समय अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू थी, उस दौरान प्रतिदिन 50 से 60 अल्ट्रासाउंड होते थे। एक माह की अगर बात करें तो 20 वर्किंग डे में एक हजार और एक साल में 12 हजार एक्स-रे यहां होते। पिछले तीन साल से यह सेवा बंद है और इस लिहाज से इस समयावधि में करीब 36 हजार से अधिक मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
- पुरुष मरीज दूसरे जिलों के तो गर्भवती महिलाएं निजी केंद्रों के लगा रहे चक्कर
सिविल अस्पताल में निशुल्क एक्स-रे करवाने पहुंचे पुरुष मरीजों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है और दूसरे जिलों की खाक छानने के बाद ही उन्हें सरकारी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। कई मरीज भागदौड़ से बचने के लिए निजी केंद्र पर 450 से 500 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड करवा लेते हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी केंद्रों से करार किया हुआ है, लेकिन इसके लिए महिलाओं को आने-जाने में छह किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।
- एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सुविधाओं के लिए इनकी दरकार
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करने के लिए नई मशीन और अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की दरकार है। इसके अलावा तीनों सीएचसी पर एक्स-रे सुविधा शुरू करने के लिए रेडियोग्राफर और रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है जबकि केवल रेडियोग्राफर के सहारे एक्स-रे सेवा चलाई जा रही है।
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वर्जन::
विशेषज्ञ और मशीन की कमी के चलते सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है। विशेषज्ञ की कमी के चलते ही सीएचसी पर एक्स-रे सेवा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। हमने इस संबंध में उच्चाधिकारियों के पास डिमांड भेजी हुई है। संसाधन मिलते ही दोनों सेवा हम शुरू करवा देंगे। इस साल विभाग के संसाधनों का दायरा काफी बढ़ा है।
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डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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फोटो 17
सिविल अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड केंद्र।
फोटो 18
गोपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
फोटो 19
बौंदकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
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