चरखी दादरी। मंत्रीजी, समय पर अगर सब्सिडी मिल जाती तो 4000 का फायदा होता, लेकिन अधिकारियों की लेटलतीफी से 25 हजार का टोटा होग्या। वीरवार को आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में राज्यमंत्री अनूप धानक के समक्ष डोहका दीना निवासी हरि सिंह ने ये बात कही।
हरि सिंह ने कहा कि पोर्टल पर 10 माह बाद तक पूरे भुगतान के विकल्प की जगह फारमा सेट चालान का विकल्प रहा, जिसके चलते वो जानकारी नहीं भर पाया और सब्सिडी का लाभ लेने में देरी हुई। वहीं, अधिकारी ने बताया कि हरि सिंह की समस्या का अब समाधान करवा दिया गया है और शिकायतकर्ता की राशि का भुगतान हो चुका है।
बता दें कि वीरवार को आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में कुल 15 परिवाद रखे गए, जिनमें से 9 परिवाद पिछली बैठक के रहे जबकि 6 परिवाद नए रहे। करीब 38 मिनट के अंदर ही राज्यमंत्री ने 15 परिवादों की सुनवाई कर दी। पहला परिवाद बिजली निगम से रिटायर्ड एएफएम लक्ष्मीनारायण का रहा। इसमें शिकायतकर्ता ने रिटायरमेंट पश्चात मिलने वाले सभी लाभ दिलाने की मांग रखी। लक्ष्मीनारायण स्वास्थ्य खराब होने के चलते नहीं पहुंच पाए। एक्सईएन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लक्ष्मीनारायण ने स्टोर से लिए गए करीब 80 लाख के सामान संबंधी दस्तावेज जमा नहीं करवाए है और इसके चलते कुछ लाभ उसे नहीं मिल पाए। मंत्री ने एक्सईएन को रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए। दूसरा परिवार पातुवास निवासी फूला देवी का ट्यूबवेल के पास गंदगी डालने का रहा।
बता दें कि ये परिवाद पिछली बैठक में भी रखा गया था और राज्यमंत्री अनूप धानक ने एडीसी डॉ. जयेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। वीरवार को ये परिवाद सामने आने पर राज्यमंत्री ने एडीसी से जवाब मांगा और मामले में ठोस कार्रवाई न होने का तर्क सुनकर मंत्री भड़क उठे। उन्होंने कह दिया कि एडीसी साहब ये बात ठीक नहीं है। आप सीनियर अधिकारी हो। ऐसा रवैया अपनाओगे तो आपके खिलाफ भी लिखकर भेज दूंगा। इस पर एडीसी ने शाम तक ही समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया। वहीं, डीसी मनदीप कौर ने कहा कि वो स्वयं शाम तक समस्या का समाधान करवा देंगी।
बैठक में खेड़ी बूरा निवासी प्रदीप, भागवी निवासी समिंद्र, निमली निवासी त्रिलोक सिंह ने गांव में बनी अवैध कब्जों की समस्या रखी और राज्यमंत्री से अधिकारियों को निर्देश देकर अवैध कब्जे हटवाने की गुहार लगाई। राज्यमंत्री के समक्ष जिला परिषद सीईओ प्रदीप कौशिक ने अपनी बात रखी। उनका तर्क सुनकर राज्यमंत्री ने तीनों शिकायतों को अगली बैठक के लिए लंबित रखा।
- 1978 में 80 प्लॉट काटकर किए अलॉट, रास्ता छोड़ा ही नहीं
बैठक में मौड़ी निवासी शेर सिंह ने बताया कि 1978 में उसे व उसके भाई समेत कई लोगों को 80 प्लॉट आवंटित किए गए थे। मौका पर अब तक निशानदेही नहीं हुई और इसके लिए वो कई बार शिकायत कर चुका है। इस पर डीआरओ कर्णव लाकड़ा ने बताया कि 1978 में ये 80 प्लॉट काटे गए थे और उस दौरान यहां रास्ता ही नहीं छोड़ा गया। चूक को दुरुस्त करवाने के लिए पंचायत विभाग को पत्र लिखा जा चुका है।
- पैक्स कर्मचारियों का फर्जीवाड़ा भी उठा
शहर निवासी शिवेंद्र उर्फ रिंपी फौगाट ने राज्यमंत्री को बताया कि पैक्स समिति कर्मचारियों ने उसकी फर्जी पासबुक व चेकबुक जारी कर खुद ही लोन लेकर भुगतान कर दिया। इस पर समिति अधिकारी ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस की ओर से जांच की जा रही है।
-मंत्री जी, यूं तो गदर ही मच जाएगा
बेरला निवासी राधाकृष्ण ने 2010 से 2015 में ग्राम पंचायत कार्यकाल में हुए गबन का मामला रखा। जिला परिषद सीईओ ने कहा कि इसकी जांच एसडीएम कर चुके हैं और करीब 24 लाख के गबन की बात सामने आई। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत 6 साल बाद तत्कालीन सरपंच से रिकवरी नहीं कर सकते। इस पर विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि मंत्री जी, अधिकारियों ने मिलीभगत कर लंबा समय निकाल दिया। गबन मामलों में अगर यूं रिकवरी नहीं होगी तो गदर मच जाएगा।
पार्षदों ने कचरा उठान टेंडर में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी की अगुवाई में पार्षद भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहुंचे। उन्होंने कचरा उठान के टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एडीसी एवं डीएमसी डॉ. जयेंद्र छिल्लर की मार्फत जांच करवाने की मांग की। राज्यमंत्री अनूप धानक ने कहा कि अगर इस मामले की जल्द जांच नहीं होता तो फिर वो इसे अगली बैठक के एजेंडे में शामिल करवाएंगे।
बैठक के एजेंडे में शामिल 15 परिवादों की सुनवाई की गई। इनमें से 9 का निपटान किया गया जबकि 6 लंबित रखे गए। कुछ मामलों में डीसी को निर्देश दिए गए हैं।
-अनूप धानक, राज्यमंत्री