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15 जलघरों में नहीं नहरी पानी का विकल्प, टैंक खाली होते ही बंद हो जाती है आपूर्ति

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जलघर में लगा बोरिंग ट्यूबवेल। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जन स्वास्थ्य विभाग जिले के 15 जलघरों में अब तक नहरी पानी का विकल्प मुहैया नहीं करवा पाया है। इसका खामियाजा करीब एक लाख की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। टैंकों में नहरी पानी खत्म होते ही जलघरों से पेयजल आपूर्ति बंद हो जाती है जो अगली नहरी टर्न पर ही बहाल हो पाती है। इस समय अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों से जुड़े लोग अपने स्तर पर ही पानी का प्रबंध करते हैं। वहीं, अधिकारियों का दावा है कि अगले वर्ष 2022 के अंत तक समस्या का समाधान हो जाएगा।
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जिले के 15 से ज्यादा जलघरों में नहरी पानी का विकल्प नहीं होने से पेयजल संकट बना रहता है। इन जलघर परिसरों में ट्यूबवेल बोरिंग करने की जरूरत है ताकि जलघरों में नहरी पानी खत्म होने पर बोरिंग ट्यूबवेल से पेयजल की सप्लाई होती रहे। जलघरों में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है जबकि नहरों में गर्मियों में 24 दिन और आम मौसम में 15 दिनों में पानी छोड़ा जाता है। जिले में 58 जलघर हैं।
जमीन संबंधी अड़चनें आने से नहीं हो रहा स्थायी समाधान
जिले में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। जल जीवन मिशन योजना पर कार्य शुरू हुआ तो जमीन संबंधी व अन्य प्रकार की अड़चनें आ गईं। ऐसे में यह काम भी अधिकतर भागों में रुका हुआ है। इस समय शहर सहित पूरे जिले में एक दिन छोड़कर पेयजल नहीं मिल पा रहा है। बीजणा, जावा, मिसरी मकड़ाना, ढाणी फौगाट, खेड़ी सनसनवाल आदि ऐसे गांव हैं जिनमें नहरी पानी का विकल्प नहीं है।
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शहर के दोनों जलघरों में 12 ट्यूबवेलों का ले रहे सहारा
जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर के दोनों जलघर परिसर में 12 बोरिंग ट्यूबवेल लगा रखे हैं। जब जलघर में नहरी पानी खत्म हो जाता है, तब उस स्थिति में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाती है। इससे पानी का संकट नहीं बन पाता। हालांकि ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता कम है, लेकिन इसे घरेलू कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सात साल पहले बने जलघरों में नहीं ट्यूबवेल
इस समय 15 से ज्यादा ऐसे जलघर हैं, जहां बोरिंग ट्यूबवेल नहीं है। ऐसे में इन जलघरों के अधीन गांवों में पानी का संकट बना रहता है। इन जलघरों में नहरी पानी 10 से 12 दिन में ही खत्म हो जाता है। इसके बाद विभाग के पास पेयजल का विकल्प नहीं बचता है। जिन गांवों में सात साल पहले नए जलघर बने हैं, उनमें बोरिंग की व्यवस्था नहीं है।
450 रुपये में टैंकर से मंगवा रहे पानी
जिन गांवों के जलघरों में बोरिंग ट्यूबवेल नहीं है, वहां टैंक खाली होने पर ग्रामीणों को 450 रुपये में टैंकर खरीदकर काम चलाना पड़ता है। यह व्यवस्था तब तक रहती है, जब तक जलघर के टैंक में नहरी पानी नहीं पहुंच जाता। ढाणी फौगाट निवासी मांगेराम, सुंदर, सोमबीर, संजय व पवन कुमार आदि का कहना है कि जलघरों के परिसर में बोरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पानी का संकट नहीं हो सके। नहरी पानी तो बहुत कम मात्रा में पहुंचता है।
विभाग हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। 2022 अंत तक इस समस्या को दूर कर दिया जाएगा। शहर में पेयजल आपूर्ति को और बेहतर करने के लिए मास्टर प्लान भी तैयार किया जा चुका है। - सुरेश कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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फोटो 12
पानी भंडारण के लिए जलघर परिसर में बना टैंक।
फोटो 13
जलघर में लगा बोरिंग ट्यूबवेल।
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