चरखी दादरी। प्रॉपर्टी आईडी की खामियां और नगर परिषद अधिकारियों का ढुलमुल रवैया लोगों पर भारी पड़ रहा है। इसकी बानगी शनिवार को नगर परिषद कार्यालय में आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर के पहले दिन देखने को मिली। शिविर में त्रुटि ठीक करवाने पहुंचे वार्ड-20 निवासी निरंजन कुमार ने बताया कि वर्ष 1985 में उन्होंने नक्शा पास करवाया था और उस समय दादरी नगर पालिका होती है। निरंजन ने बताया कि उस दौरान उनसे सभी शुल्क भरवाए गए थे, लेकिन अब नगर परिषद अधिकारियों ने 19.90 लाख का विकास शुल्क बकाया दिखाकर उन्हें नोटिस भेजा है।
दादरी जिले में करीब 35 हजार प्रॉपर्टी आईडी हैं। इनमें से 5000 से ज्यादा प्रॉपर्टी आईडी में कोई न कोई खामी है। खामियां ऐसी हैं कि लोगों के सिर चकराए हुए हैं। प्रॉपर्टी आईडी बनने के बाद से ही लोग कभी नगर परिषद तो कभी डीसी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। इस भागदौड़ से कई लोगों की समस्याओं का समाधान हो चुका है जबकि काफी लोगों की समस्याएं बरकरार हैं। लोगों की सहुलियत के लिए सरकार के निर्देशों पर नगर परिषद कार्यालय में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक विशेष शिविर लगाया गया। शाम 4 बजे तक करीब 70 लोग शिविर का लाभ उठाने पहुंचे।
कुछ लोगों ने बताया कि कई साल पहले वो भवन का नक्शा पास करवा चुके हैं और उस दौरान उन्होंने सभी शुल्क भरे थे। अब प्रॉपर्टी आईडी बनने के बाद उनकी तरफ भारी भरकम राशि बकाया बताई गई है। यह राशि भरना उनके लिए असंभव है। नगर परिषद की ओर से हुई चूक को सुधरवाने के लिए वो कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं जबकि अधिकारी समस्या का समाधान करने के बजाय उनसे ही पुरानी रसीदें मांगकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। निरंजन ने बताया कि जब वो पुराना रिकॉर्ड दिखाने की बात कहता है तो कर्मचारी मना कर देते हैं।
जानिये...किसकी आईडी में क्या खामी और क्या है कहना
- वर्ष 1985 में नगर परिषद से नक्शा पास करवाया गया था। उसी दौरान पूरा टैक्स जमा करवाया गया था। अब 19 लाख 90 हजार 65 रुपये विकास शुल्क बकाया होने का नोटिस दिया गया है। कई बार नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। आज भी स्थिति पहले जैसी रही।
निरंजन कुमार, वार्ड 20
- लगभग 12 वर्ष पहले वार्ड 20 में प्लाॅट खरीदा था, लेकिन प्लॉट की प्रापर्टी आईडी में हमारा नाम दर्ज नहीं हो रहा। कई बार नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शायद समाधान हो जाए, ये उम्मीद लेकर ही शनिवार को आयोजित कैंप में आया हूं।
जयवीर सिंह, वार्ड-20
- वर्ष 2011 में ढाणी फाटक के पास दुकान खरीदी थी। इसका लगातार टैक्स भर रहे हैं, लेकिन नगर परिषद ने 12,128 रुपये टैक्स और 5371 रुपये जुर्माना राशि का नोटिस भेज दिया है। इस चूक को सुधरवाने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगाने को विवश हूं।
दिनेश कुमार, गांधी नगर
- वार्ड 17 में वर्ष 1973 में मकान बनाया था, उस दौरान क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती थी। अब प्रॉपर्टी आईडी में नाम दर्ज करवाने आए तो नगर परिषद कर्मचारी रजिस्टरी लाने की बात कह रहे हैं। जब आगे की जानकारी लेने का प्रयास किया तो सर्वे के बाद ही चूक सुधरने की बात कही गई।
दरियाव सिंह, वार्ड-17
नगर परिषद के नियम अनुसार विकास शुल्क तो एक बार भरना ही होता है। अगर किसी के पास विकास शुल्क भरने की रसीद है तो हमें दिखाए, हम दोबारा विकास शुल्क नहीं लेंगे।
राजेश वर्मा, ईओ, नगर परिषद