चरखी दादरी। जिला जैव विविधता से परिपूर्ण है और यहां बहुत सी प्राकृृतिक संपदा प्रकृति की गोद में बिखरी हुई हैं, जिसे सहेज कर रखने की जरूरत है। इसी दिशा में जैव विविधता बोर्ड ने ग्रामीणों के बीच जाने और गांव की अनमोल संपत्ति की पहचान करने का प्रयास शुरू किया है। प्रकृति की रक्षा के लिए हर गांव को जागरूक होना होगा।
जैव विविधता बोर्ड की जिला समंवयक बबीता श्योराण ने बताया कि अरावली की तलहटी में बसे गांव अटेला कलां की पहाड़ी में आज भी अनेक जीव जंतु और औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इस पहाड़ी पर जंगली बिल्ली, लकड़बग्गा, सेह, बाज, तोते, कबूतर, तीतर, खरगोश, नेवले, चूहे, सर्प, चील, नीलगाय, जंगली सूअर, हिरण आदि दिखाई देते हैं। इसके अलावा यहां बासा, हड़ज्जूड़, सदाहारी, देसी कीकर, जांटी, नीम, पीपल, पीलपानी, हिंगोरण, सहमूली, सदुणु इत्यादि औषधीय गुणों वाले पौधे काफी संख्या में मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि इस गांव के कालूराम नामक व्यक्ति ने खुद अपने प्रयासों से पहाड़ी के ऊपर एक तालाब का निर्माण करवाया था। तालाब की देखरेख अब कालूराम के बेटे वेदप्रकाश करते हैं। वेदप्रकाश ने इस पहाड़ी की जैव विविधता को रक्षित रखने में काफी काम किया है और अभी भी उनके प्रयास जारी हैं। गांव की बीएमसी में वेदप्रकाश जैसे प्रकृति प्रेमी को शामिल कर लिया गया है।
पीबीआर में लिखा जाएगा वन्य व प्राकृतिक संपदा का विवरण
उन्होंने बताया कि गांव अटेला कलां की पीबीआर अर्थात पीपल बायोडाइवर्सिटी रजिस्टर बनाया जा रहा है। यह पीबीआर हर एक गांव की बनाई जाएगी, जिसमें गांव की वन्य व प्राकृतिक संपदा का समस्त विवरण लिखा जाएगा। भविष्य में इनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ होगी तो उसके लिए बीएमसी यानि कि गांव की बायो मैनेजमेंट कमेटी से अनुमति लेनी होगी।
महिलाओं ने भी पेड़ों और जानवरों की देखभाल करने की जताई इच्छा
टीम के दौरे के दौरान गांव की महिलाओं ने भी अपनी रुचि दिखाते हुए पेड़-पौधों व जानवरों की देखभाल के प्रति इच्छा जाहिर की। गांव की इस पहाड़ी को वन विभाग की ओर से रिजर्व में रखा गया है और यहां खनन कार्य नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों के साथ इस मौके पर वन दरोगा मीर सिंह, शक्ति सिंह, सुरेंद्र आदि मौजूद रहे।