चरखी दादरी। लंबे इंतजार के बाद शुरू हुआ ऐेतिहासिक श्यामसर तालाब के जीर्णोद्घार का काम फिर से रुक गया है। एजेंसी की ओर से पानी निकासी के लिए की गई व्यवस्था पर जन स्वास्थ्य विभाग ने आपत्ति जताई है। विभाग के अधिकारियों ने तालाब के पानी को सीवर लाइन में नहीं डालने की बात कही है। अगर एजेंसी ने ऐसा किया तो एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसके बाद एसडीएम एवं नप प्रशासक विरेंद्र सिंह ने अधिकारियों की मार्फत एजेंसी को कार्य बंद करने के निर्देश दे दिए। अब यह मामला डीसी दरबार पहुंच गया है।
श्यामसर तालाब के जीर्णोद्धार की घोषणा मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सितंबर 2016 में की थी। शुरुआत से ही यह योजना लेटलतीफी का शिकार है। शुरुआत से मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर कोई न कोई अड़चन आ रही है। पहले सरकार ने 27 करोड़ का प्रपोजल तैयार कराया था और बाद में निर्माण कार्य को तीन चरणों में पूरा करवाने के निर्देश देते हुए रिवाइज एस्टीमेट तैयार करवाया। इसके तहत तालाब की कायाकल्प के पहले चरण पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
सुंदरीकरण से पहले एजेंसी ने करीब एक माह पहले तालाब का डी वाटरिंग कार्य शुरू किया था। इसके तहत तालाब के पानी की निकासी चिड़िया मोड़ के समीप सीवर लाइन में की जा रही थी। इस पर जनस्वास्थ्य विभाग ने एतराज जता दिया। मामला एसडीएम एवं नप प्रशासक विरेंद्र सिंह के पास पहुंच गया और जनस्वास्थ्य विभाग के कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद नप अधिकारियों ने तुरंत एजेंसी को काम बंद करने के निर्देश दे दिए। पिछले दस दिनों से यह स्थिति बरकरार है और तालाब से पानी की निकासी करने का काम बंद है। सूत्रों के अनुसार बुधवार को यह मामला डीसी दरबार भी पहुंच गया। डीसी प्रदीप गोदारा ने जनस्वास्थ्य विभाग और नप अधिकारियों को आपसी सामंजस्य स्थापित कर योजना को सिरे चढ़ाने में आई अड़चन के समाधान के निर्देश दे दिए हैं।
पहले चरण में होना है यह कार्य
पहले चरण में पानी निकासी के साथ तालाब की सफाई की जाएगी। मौजूदा दीवार से हटकर आरसीसी से एक नई दीवार बनाई जाएगी। दोनों दीवारों के बीच लोगों के सैर करने के लिए वॉकिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा। साथ ही तालाब के चारों ओर लोगों की सुविधा के लिए पार्क और पार्किंग का निर्माण भी किया जाएगा। फिलहाल तालाब के जीर्णोद्धार के बाद इसमें बरसाती पानी संचयन की योजना है। मौजूदा दीवार सहित तालाब के पूरे ढांचे की मरम्मत भी की जाएगी। तालाब में बने चारों घाटों की हालत को भी प्रोजेक्ट के तहत सुधारा जाएगा।
यह है तालाब का इतिहास
यह तालाब लगभग 400 साल पहले शाहजहां के दरबार में शाही खजांची के तौर पर काम करने वाले लाला सीताराम ने बनवाया था और उस समय में इस पर एक लाख मुद्राएं खर्च हुई थीं। जानकारों के अनुसार करीब दो दशक पहले तालाब को खाली किया गया था। उस दौरान इसकी तलहटी चूने की मिली थी। करीब ढाई सप्ताह पहले एजेंसी की लेबर डी-वाटरिंग कार्य शुरू करने दादरी पहुंची थी, लेकिन अब तक यह काम शुरू नहीं हुआ है।
सीवर लाइनों में नहीं डालने देंगे पानी : एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन दलबीर दलाल का कहना है कि एसटीपी में दूषित पानी के भंडारण के लिए जगह का अभाव है। एजेंसी सीवर लाइन में पानी डाल रही थी जिससे एसटीपी पर पहुंचने वाले पानी की मात्रा बढ़ गई थी और व्यवस्था बनाने में दिक्कतें आ रही थीं। इसके चलते ही काम रुकवाया गया है और हम सीवर लाइनों में तालाब का पानी नहीं डालने देंगे।
उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ला चुके मामला, जल्द होगा समाधान : सचिव
नगर परिषद सचिव प्रशांत पाराशर ने बताया कि सरकार और एनजीटी की गाइडलाइन है कि बिना उपचारित दूषित पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ही डाला जाए। एजेंसी इसी गाइडलाइन की पालना कर पानी निकासी करवा रही थी। यह मामला हमने उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ला दिया है और जल्द ही अड़चच को दूर करवाकर डी-वाटरिंग कार्य हम शुरू करवा देंगे।