जिले की पेयजल आपूर्ति में सुधार करने और हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना की फाइल को सरकार ने मंजूरी दे दी है। जनस्वास्थ्य विभाग इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए जुट गया है। योजना के तहत जिले में 35 नए बूस्टर बनाए जाने हैं, तो वहीं, शहर में पेयजल भंडारण की क्षमता बढ़ाई जानी है। योजना के तहत नई पाइप लाइन बिछाना, कनेक्शन नियमित करना और नए जलघर बनाना शामिल है।
जिले में पेयजल आपूर्ति में चार दशक में नाममात्र ही सुधार हो पाया है। कई गांवों के जलघरों में नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा है, तो कहीं पाइप लाइनों की कमी की वजह से आपूर्ति संभव नहीं है। पेयजल कनेक्शनों की संख्या भी सीमित है। जिले में 58 जलघर हैं, जो चार दशक पहले के बने हैं। इन चार दशकों में जिले की आबादी बढ़ने से पानी की खपत भी बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति में सुधारीकरण नहीं हो सका है।
अब विभाग इस काम को सिरे चढ़ाए जाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक गांव में पेयजल कनेक्शनों को नियमित किया जाएगा। जिले में इस समय करीब 25 हजार से ज्यादा कनेक्शन नियमित तो करीब 15 हजार अवैध कनेक्शन हैं। अवैध पेयजल कनेक्शन ज्यादा होने के कारण सरकारी राजस्व में भी घाटा हो रहा है और पानी का समान वितरण भी नहीं हो पा रहा है।
कनेक्शन नियमित करवाने की फीस
गांव में पेयजल कनेक्शन नियमित करवाने की फीस 500 रुपये है और प्रतिमाह पानी का बिल 40 रुपये है। अनुसूचित वर्ग के लिए यह बिल राशि 20 रुपये प्रतिमाह है। शहर में 120 रुपये प्रतिमाह बिल है। शहर में जिन उपभोक्ताओं ने कनेक्शन पर पानी का मीटर लगवा रखा है, उनसे प्रतिमाह 60 रुपये बिल लिया जाता है।
प्रत्येक गांव में तीन से चार किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने की योजना
विभाग प्रत्येक गांव में जरूरत के अनुसार नई पाइप लाइन भी बिछाएगा, ताकि प्रत्येक घर तक पानी पहुंच सके। इसके लिए गांवों के सरपंचों से भी डिमांड की जा रही है। कई गांवों में पुुरानी एवं कंडम लाइन होने की वजह से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रत्येक गांव में करीब तीन से चार किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाए जाने की योजना है।
ये भी है प्रोजेक्ट का हिस्सा
इस योजना के तहत जिन गांवों में जलघर की जरूरत है, वहां नए बनाए जाएंगे। इन जलघरों में नहरी पानी डाला जाएगा। गांव की आबादी एवं पानी की खपत को देखते हुए जलघर बनाए जाएंगे। कई गांवों के लिए एक सामूहिक रूप से बूस्टिंग भी बनाए जाने की योजना है।
जरूरत 7400 लाख लीटर की, है 3700 लाख लीटर की क्षमता
शहर के दो जलघरों में पानी भंडारण के लिए छह टैंक बने हैं। रामनगर जलघर की भंडारण क्षमता 1250 लाख लीटर है, जबकि चंपापुरी जलघर की 2450 लाख लीटर है। शहर की आबादी 90 हजार से अधिक है और इस लिहाज से भंडारण क्षमता करीब 7400 लाख लीटर होनी चाहिए, लेकिन क्षमता 3700 लाख लीटर की है।
इस प्रोजेक्ट की फाइल को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत नई पाइप लाइन बिछाना, पेयजल कनेक्शन देना, जलघर बनाना आदि सभी बिंदुओं पर काम पूरा किया जाएगा। शहर में भी पेयजल की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
शशिकांत, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग