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Charkhi Dadri News: लौटते समय हुआ हमला, तीन दिन रहे भूमिगत, पुलिस दिल्ली तक छाेड़कर गई

Sat, 20 Jan 2024 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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 चरखी दादरी के रविंद्र गुप्ता।
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चरखी दादरी। वर्ष 1989 में अयोध्या में हुए शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जिले से 12 कारसेवकों की एक मेटाडोर गई थी। वहां से लौटते समय समुदाय विशेष के लोगों ने उनपर हमला कर दिया। विहिप संगठन ने उन्हें तीन दिन तक भूमिगत रखा। इसके बाद पुलिस तीन गाड़ियां में उन्हें दिल्ली तक छोड़कर गई।
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कारसेवक उमेद सिंह ने बताया कि एक ओर विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में शिलान्यास कार्यक्रम की घोषणा की और दूसरी तरफ समुदाय विशेष के लोगों ने रोष प्रदर्शन करने का एलान किया था। उस दिन विहिप की अगुवाई में सभी कारसेवक वहां पहुंच गए थे, जबकि समुदाय विशेष के लोग वहां नहीं पहुंचे। इस तरह उनका शिलान्यास कार्यक्रम शांतिपूर्वक पूरा हो गया। इस दौरान वे अयोध्या से चित्रकुट के लिए रवाना हुए थे। जब वे अयोध्या से 70 किलोमीटर दूर पहुंचे तो वहां एक गांव में समुदाय विशेष के लोगों ने उनकी गाड़ी रुकवा ली।
उक्त लोगों ने गाड़ी पर फरसा, ईंटें व डंडे मारने शुरू कर दिए। इसमें उसको सिर में चोट आई और गाड़ी के शीशे भी टूट गए। इस दौरान वे किसी तरह बचकर वहां गाड़ी निकाली। जब गांव से निकले तो एक दूध वाले आदमी ने उनकी गाड़ी रुकवा ली। उसने बताया कि आगे आगे गोलियां चल रही हैं और वहां जाना खतरे से खाली नहीं है।
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इसके बाद उन्होंने गाड़ी वापस मोड़ ली और चल दिए। उसी गांव में जब पहुंचे दबंगों ने साइकिल डालकर उनका रास्ता रोकने की कोशिश की। परंतु उसने गाड़ी भगाकर निकाली। लगभग 30 किलोमीटर तक वह साइकिल गाड़ी के साथ घिसटती रही। उन्होंने बताया कि बाद में विहिप संगठन ने उन्हें तीन दिन तक भूमिगत रखा और पुलिस की तीन गाड़ियां उन्हें दिल्ली तक छोड़कर गई। अब सभी कारसेवक मंदिर में जाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि अब अगले माह शुरूआत में ही अयोध्या जाने की तैयारी है।



1989 में शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या गया था। उस समय मैं विहिप का जिला अध्यक्ष था। मुझे जिले से कारसेवक अयोध्या भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि में आंदोलनों में शामिल नहीं हो पाया। आज राम मंदिर के बनने से बहुत खुश हूं। - रविंद्र गुप्ता, कारसेवक

- 18 साल की उम्र में परिजनों के साथ गया
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान अपने ताऊ व चाचा आदि के साथ गया था। उस समय मेरी उम्र करीब 18 साल थी। जब वहां गया तो अयोध्या में लोगों की काफी भीड़ थी। उत्साह में आकर मैं अपने परिजनों साथ चला गया था। उस समय मेरे साथ कोई अनहोनी नहीं हुई। अब पूरे परिवार सहित राम दर्शन करने जाऊंगा। - विष्णु सैनी, कारसेवक


मुश्किल से बची थी जान
शिलान्यास कार्यक्रम में जिले से कारसेवकों को लेकर निकला था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मैंने चित्रकूट जाने की सोची थी, लेकिन रास्ते में एक दंगा हो गया। गाड़ी सवार कासेवकों की जान बचाने के लिए आधे रास्ते से ही लौट आए। दिल्ली तक पुलिस हमें छोड़ने आई थी। - उमेद सैनी, कारसेवक
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