संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। आरटीए दर्शना भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के बाद से जिले में स्थायी आरटीए की तैनाती नहीं हुई है। अन्य जिलों के आरटीओ की तीन टीमें भी हट गई हैं। दूसरे जिलों के आरटीए भी दादरी जिले में ओवरलोड वाहनों के चालान में रूचि नहीं ले रहे हैं। इसके कारण ओवरलोडिंग धड़ल्ले से जारी है।
ओवरलोडिंग जिले की सबसे बड़ी समस्या है। सड़कों पर दौड़ते भारी वाहन राहगीरों और अन्य वाहन चालकों का काल बन रहे हैं। इस साल की बात करें तो अब तक 30 सड़क हादसे हो चुके हैं। विभाग ने महेंद्रगढ़ जिले में तैनात आरटीए को दादरी का अतिरिक्त कार्यभार दिया है, लेकिन व्यापक स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही।
कष्ट निवारण समिति की बैठक में ओवरलोडिंग का मुद्दा दो बार उठा था। मुद्दा जोर-शोर से उठने के बाद सरकार ने छह जिलों के एक-एक अधिकारी की दादरी में चेकिंग के लिए विशेष ड्यूटी लगाई थी। इनमें से तीन अधिकारियों की ड्यूटी अभी हट चुकी है,जबकि तीन की जारी है। हालांकि तीन टीमों की तैनाती का धरातल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा।
सूत्रों की मानें तो डीसी मनदीप कौर पिछले पंद्रह दिनों से तीनों टीमों से ओवरलोड वाहनों के चालान की रिपोर्ट मांग रही हैं, लेकिन अब तक रिपोर्ट उनके पास भी नहीं भेजी गई है। ऐसे में संशय है कि ओवरलोड वाहनों की चेकिंग में कोताही बरती जा रही है।
पांच हजार डंपर गुजरते हैं प्रतिदिन
जिले की बात करें तो 9 खनन क्षेत्र से प्रतिदिन करीब पांच हजार भारी वाहन गुजरते हैं। ये वाहन शहर के रावलधी-दिल्ली बाईपास से होकर रोहतक, दिल्ली, गुरूग्राम, अंबाला समेत विभिन्न जिलों के लिए गुजरते हैं। कतार में सड़क पर डंपर चलने से अन्य वाहन चालकों को परेशानी होती है और दस मिनट की दूरी तय करने में 30 मिनट या इससे अधिक भी समय लग जाता है।
पिछले साल पकड़े थे 3805 ओवरलोड वाहन, 13.11 करोड़ वसूला था जुर्माना
जिले में ओवरलोडिंग रोकने के लिए वर्ष 2023 के अंत में 7 टीमें लगाई गई थीं। पिछले साल की बात करें तो 3805 ओवरलोड वाहन पकड़े गए थे और उन पर 13.11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
दूसरे जिलों की 6 में से 3 टीमें ही ओवरलोड वाहनों की चेकिंग कर रही है। ओवरलोडिंग जिले की बड़ी समस्या है और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। - मनदीप कौर, डीसी।