चरखी दादरी। शहर में कचरा समायोजन की समस्या को खत्म करने के लिए 15 माह पहले पांच एकड़ जमीन पर बनाया गया एमआरएफ (मेटिरियल्स रिकवरी फेस्लिटी) सेंटर शोपीस बनकर रह गया है। इसके निर्माण पर 25 लाख रुपये खर्च हुए थे, लेकिन डेढ़ साल बाद भी यह सेंटर वर्किंग में नहीं है। आलम यह है कि यहां कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इतना ही नहीं कूड़े को पृथक करने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है। ऐसे में अलग-अलग प्रकार का कचरा डालने के लिए बनाए गए पिट कचरे से ठसाठस भरे हैं।
नगर परिषद के पास इस समय शहर का कचरा डालने के लिए जगह नहीं है। रानिया वाला जोहड़ की चार एकड़ जमीन पर ही शहर का कचरा डाला जाता है। यहां सालों से पड़े कचरे का सरकार निस्तारण करवा रही है। डंपिंग यार्ड पर कम से कम कचरा पहुंचे, इस उद्देश्य के साथ करीब डेढ़ साल पहले रावलधी-भिवानी लिंक रोड पर दमकल कार्यालय के समीप 25 लाख खर्च कर एमआरएप सेंटर बनाया गया था। इस सेंटर का निर्माण पूरा हुए करीब डेढ़ साल बीत चुका है, लेकिन नप अधिकारी इससे आगे की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। इसके चलते यहां कचरा पृथक करने की प्रक्रिया बंद है। वहीं, सूत्रों के अनुसार रानिया वाला जोहड़ डंपिंग यार्ड तक कचरे की गाड़ियां पहुंचने में दिक्कत आने पर मजबूरीवश कचरा सीधे एमआरएफ सेंटर पर ही डाला जा रहा है। पिछले करीब एक साल से नगर परिषद कर्मचारी नियमित अंतराल पर यहां कचरा डाल रहे हैं।
एमआरएफ सेंटर के निर्माण की ये थी योजना
नगर परिषद अधिकारियों की योजना थी कि डंपिंग यार्ड से पहले कचरा एमआरएफ सेंटर पर भेजा जाए। वहां कांच, प्लास्टिक, गत्ता, रबर और अन्य प्रकार के कचरे को पृथक कर अलग-अलग पिट में डाला जाए। यहां से दोबारा प्रयोग होने वाले कचरे का उठान करवाया जाना था, जबकि दोबारा काम न आने वाला कचरा डंपिग यार्ड तक पहुंचाया जाना था। अधिकारियों का तर्क था कि एमआरएफ सेंटर बनने के बाद डंपिंग यार्ड तक आधा ही कचरा पहुंचेगा।
दोनों कर्मचारियोें के पास काम नहीं
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि एमआरएफ सेंटर में आठ पिट बनाए गए हैं। इसके अलावा यहां दो कर्मचारी भी नप अधिकारियों ने तैनात कर रखे हैं। एमआरएफ सेंटर वर्किंग में नहीं होने से ये दोनों कर्मचारी दिनभर खाली बैठकर चलते जाते हैं।
पिट में उगी झाड़ियां, कचरा भी काफी
एमअरएफ सेंटर में गत्ता, कांच, प्लास्टिक, लकड़ी, धातु व ई-कचरा डालने के लिए अलग-अलग पिट बनाए हुए हैं। इनमें से चार पिट खाली हैं, जिनमें घास व झाड़ी उगी हुई है। वहीं, अन्य पिट में कचरे की भरमार है और इन्हें नियमित खाली नहीं किया जा रहा है।
वर्जन::
एमआरएफ सेंटर में रेगुलर काम नहीं हो पा रहा है। शहर के लोग गीला-सूखा कचरा एकसाथ डाल देते हैं, जिससे व्यवस्थाएं बनाने में हमें सहयोग नहीं मिल पा रहा। जल्द ही एमआरएफ सेंटर वर्किंग में ले आएंगे और इसके बाद कचरा समायोजन की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। लोगों से अपील है कि वो गीले व सूखे कचरे का निस्तारण अलग-अलग करें।
प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद
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