बौंदकलां। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से शनिवार को गांव मिसरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें चिकित्सकों ने पशुपालकों को गर्मी में पशुओं के रखरखाव व गर्मी से बचाव की जानकारी दी।
वेटरनरी सर्जन डॉ. महासिंह ने बताया कि पशुओं का शेड खुला व हवादार होना चाहिए और शेड की छत ऊंची होनी चाहिए। अगर शेड की छत टीन की बनी है तो उस पर पराली आदि की परत डालकर रखें ताकि अंदर का तापमान कम रहे। पशुओं के शेड की दिशा पूर्व से पश्चिम की तरफ होनी चाहिए। पशुओं के शेड में पंखे व कूलर का प्रयोग करें। पशु खुले में केवल घने छायादार वृक्ष के नीचे बांधे और दिन में दो बार जोहड़ में लेकर जाएं। इसके अलावा पशुओं के पीने के लिए हर समय सामान्य तापमान या थोड़ा ठंडा पानी उपलब्ध रखें। छोटे पशुओं का विशेष ध्यान रखें और गर्मी से बचाने के लिए स्थायी पानी पात्र रखें।
उन्होंने सभी पशुपालकों से इन उपायों पर अमल करने का आह्वान किया। इस दौरान मिसरी वेटरनरी सर्जन डॉ. संतोष कुमारी, पीयूष, अनिल, सुरेंद्र, पंकज, कंवरपाल, लोकेश व राकेश आदि मौजूद रहे।
हीट स्ट्रोक प्रबंधन के लिए ये रखें सावधानी....
1. जानवरों को खराब वायु प्रवाह क्षेत्रों में कैद न करें।
2. अत्यधिक गर्मी के दौरान मवेशियों का परिवहन न करें।
3. पशु बाड़ों में भीड़भाड़ से बचे।
4. यदि हीट स्ट्रोक के लक्षण हो तो उपचार में देरी न करें।
5. गर्म मौसम के दौरान पशु आहार में अचानक बदलाव से बचें।
मवेशियों मे हीट स्ट्रोक प्रबंधन के लिए करें ये उपाय....
1. उन्हें पर्याप्त छायादार और हवादार वातावरण प्रदान करें।
2. उनके लिए हर समय ठंडे व साफ पानी की व्यवस्था करें।
3. गर्म अवधि के दौरान पशुओं के व्यायाम को सीमित करें।
4. पशुओं के शारीरिक तापमान की नियमित रूप से निगरानी करें।
5. यदि आवश्यक हो तो इलेक्ट्रोलाइट अनुपूरक प्रदान करें।
6. यदि हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दे तो नजदीकी पशु चिकित्सालय से सहायता लें।