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अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन : मंजुलाश्री

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जैन साध्वियों को विदाई देते हुए जैन समाज सदस्य। 
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चरखी दादरी। मानव जीवन व सोच का सबसे बड़ा विरोधी मनुष्य का अहंकार है। यह एक ऐसा भाव है जो अंतर में समाहित हो जाए तो सभी सद्गुणों का लोप हो जाता है और मनुष्य पतन की राह पर चल पडता है। यह वचन साध्वी मंजुलश्री ठाणे ने नगर की सीमा पर विदाई लेते समय श्रद्धालुओं को कही।
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महासचिव राजीव गर्ग ने बताया कि साध्वी ने कुछ दिन के प्रवास के बाद शुक्रवार को रोहतक के लिए विहार किया। इसके लिए जैन सभा सदस्य उनको विदा करने के लिए नगर सीमा तक गए और आशीर्वाद लिया। साध्वी ने बताया कि अहंकार एक ऐसा भाव है जो कि धनी से धनी व गुणवान से गुणवान मानव को भी पतन की राह पर ले जाता है।
बलवान व्यक्ति भी अपने इसी दुर्गुण के चलते अपनी ख्याति को खो बैठा और उनका नाम केवल उनके बुरे कर्मों के लिए लिया जाता है। इसलिए कभी भी इस भाव को अपने अंतर्मन पर भारी न होने दें। उन्होंने कहा कि जीवन में हमेशा प्रेम, सदभाव, प्रभु के प्रति सच्ची निष्ठा को स्थान दें। इससे यह जन्म सुधरेगा और मनुष्य भव सागर को पार पाने में सफल होगा।
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एसपी अर्श वर्मा के निर्देश पर साध्वियों की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों ने शहर से गांव सांवड़ तक नगर विहार में अपना पूर्ण सहयोग दिया। इस दौरान इंद्रचंद जैन, राजीव जैन, मुकेश जैन, टीनू जैन, लक्की जैन, विनोद जैन, मंजू जैन, तमन्ना जैन, नैना जैन, शांति जैन आदि मौजूद रहे।
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