प्रधानमंत्री फसल बीम योजना के तहत बीमा राशि देने की बजाय आवेदनों को तीन माह बाद रद्द करने के मामले में अब बीमा कंपनी यू-टर्न लिया है। इस मामले में जिन किसानों के आवेदन रद्द किए गए थे उन्होंने गत नवंबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजी थी। इसके बाद अब बीमा कंपनी ने जिले में रद्द किए गए 450 आवेदनों को स्वीकृत्त कर लिया है। किसानों से जुड़े इस मुद्दे को अमर उजाला ने अपने अलग-अलग संस्करणों में प्रमुखता से उठाया था।
बौंदकलां निवासी किसान मुलतान सिंह और अमित कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत में बताया था कि मुलतान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी पांच एकड़ भूमि का खरीफ की फसल कपास का बीमा बजाज एलायंस से जुलाई 2020 में करवाया था। जबकि अमित कुमार ने सात एकड़ भूमि की बाजरा की फसल का बीमा करवाया था। बजाज एलायंस कंपनी ने फसल का बीमा करवाने के तीन महिने बाद बिना किसी कारण के उनके आवेदन रद्द कर दिए। जबकि किसानों की फसल में मानसून की बारिश से नुकसान हुआ था। जिसकी शिकायत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग चरखी दादरी को दी थी। शिकायत के आधार पर ही बीमा कंपनी और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने संयुक्त रूप से खराब फसल का मुआयना करने के बाद नुकसान आंकलन रिपोर्ट बनाने के बावजूद मुआवजा नहीं देकर आवेदन ही रद्द कर दिए थे। बीमा कंपनी ने नवंबर माह में बौंदकलां के करीबन 150 और पूरे जिले के 450 रबी की फसल बीमा योजना के आवेदनों को कागजात में कमी बताकर रिजेक्ट किए थे।
पीएम नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजने वाले एडवोकेट अमित परमार ने बताया कि फसल बीमा योजना के आवेदन करने के तीन महीने बाद बीमा कंपनी ने सर्वे करने के बाद फार्मर कॉपी देने की बजाय रद्द कर दिए थे। पीएम को शिकायत भेजने के बाद ही फसल बीमा कंपनी ने आवेदनों को अप्रूवल दी है। स्टेटस रिपोर्ट में मुआवजा प्रोसेस में भी दर्शा रहा है। जिसकी सूचना शिकायतकर्ता को ई-मेल पर भेजी गई है।
बजाज एलायंस फसल इंश्योरेंस कंपनी के एरिया मैनेजर दिवेश शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले के 450 के लगभग आवेदन रिजेक्ट किए गए थे। उनके पास अभी कितने रबी फसल बीमा के आवेदन कर पहुंचे थे और कितने रिजेक्ट किए गए थे, ये जानकारी अभी नहीं है। लेकिन जिन किसानों ने दोबारा जमीनी कागजात स्कैन करके अपलोड कर दिए थे उनको मंजूरी दी गई थी। ज्यादातर आवेदन कॉमन सर्विस सैंटर के जरीये भरे गए रिजेक्ट हुए हैं। पीएम को शिकायत भेजने के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।