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जिले में बनेंगे आठ नए जलघर, 4800 लाख लीटर बढ़ेगी भंडारण क्षमता

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जनस्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए आठ नए जलघर बनाने की योजना तैयार की है। इसके तहत पांच इंटरमीडिएट (मध्यम श्रेणी) जलघर और तीन सामान्य श्रेणी के जलघर बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि इंटरमीडियट जलघर निर्माण के वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुके हैं। इन जलघरों का निर्माण होने से जिले की करीब 80 हजार की आबादी को राहत मिलेगी। वहीं, जिले की पेयजल भंडारण क्षमता भी 4800 लाख लीटर बढ़ जाएगी।
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जल जीवन मिशन योजना के तहत केंद्र सरकार की योजना के तहत पेयजल आपूर्ति में सुधार के लिए जन स्वास्थ्य विभाग तेज गति से काम कर रहा है। शहर के अलावा गांवों में भी 40 साल पुराना पेयजल सिस्टम चला हुआ है। गर्मी मौसम मेें तो पेयजल के हालात बेहद खराब हो जाते हैं। लोगों की पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पेयजल आपूर्ति में सुधार की दिशा में अब नए जलघर बनाए जाने पर काम शुरू हो गया है। जनस्वास्थ्य विभाग जलघरों के निर्माण के प्रोजेक्ट को एक साल में पूरा करेगा।
इन गांवों में बनेंगे इंटरमीडिएट जलघर
जिले के गांव कादमा, किष्किंधा, कुब्जानगर, जेवली व मांढ़ी हरिया में इंटरमीडियट जलघर बनवाए जाएंगे। इन गांवों में जलघर बनाने के बाद साथ लगते गांवों में बूस्टर बनाकर पानी की आपूर्ति की जाएगी। जिला के बाढड़ा खंड के प्रत्येक गांव में पानी के बूस्टर बनने हैं। इस प्रोजेक्ट का वर्क भी अलॉट हो गया है और अब वन विभाग से पेड़ काटे जाने की अनुमति लेना बाकी है। उसके बाद काम शुरू हो जाएगा।
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1.25 करोड़ से बनेंगे सामान्य श्रेणी के जलघर
विभाग ने गांव डूडीवाला नंदकरण, मानकावास व रामपुरा में सामान्य श्रेणी के तीन नए जलघर बनाने की योजना तैयार की है। इस प्रोजेक्ट के एस्टीमेट तैयार कर विभाग ने हेड ऑफिस भेज दिया है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1.25 करोड़ का बजट खर्च होने का अनुमान है। इन जलघरों में पानी डाले जाने के लिए डीआई पाइप लाइन बिछाई जाएंगी।
उपमंडल के ज्यादातर गांव हैं डार्क जोन
बाढड़ा उपमंडल के 40 से अधिक गांव इस समय डार्क जोन में हैं। इन गांवों में भूमिगत जल का स्तर भी काफी नीचे है, जिसके चलते ग्रामीणों को पेयजल संकट से गुजरना पड़ रहा है। नए जलघरों के निर्माण के बाद डार्क जोन में शामिल दस से अधिक गांवों को सीधे तौर पर फायदा होगा। वहीं, समीपवर्ती गांवों को भी इन जलघरों के निर्माण से लाभ मिलेगा।
जलघरों की ये होती हैं तीन श्रेणी
पहली श्रेणी- सामान्य क्षमता का जलघर
दूसरी श्रेणी- इंटरमीडिट जलघर
तीसरी श्रेणी- बूस्टर
विभाग पेयजल आपूर्ति में सुधार की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत ही नए जलघर बनाए जा रहे हैं। पाइप लाइनें भी बिछाई जाएंगी। प्रति व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो सकेगा।
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सुरेश कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
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