कपास की फसल के टिंडे में लगी सुंडी।
चरखी दादरी। सितंबर माह के दौरान कपास की फसल को गुलाबी सुंडी के प्रकोप से बचाने के लिए किसान लगातार निगरानी रखें। इस समय फसल में तेजी से फल, फूल व टिंडे आने आरंभ हो गए हैं। कृषि अधिकारी डाॅ. चंद्रभान श्योराण ने बताया कि रेतीले इलाके में पोषक तत्वों की सर्वाधिक कमी अभी महसूस की जाएगी। जो फसल सौ दिन के आसपास या इस अवधि से कम की है, वहां सौ लीटर पानी में दो से ढाई किलोग्राम यूरिया तथा तीन सौ ग्राम जिंक सल्फेट का घोल बनाकर फसल में छिड़काव करें।
उन्होंने बताया कि जो कपास की फसल 120 दिन से अधिक की हो गई है, वहां 13-0-45 के दो पैकेट प्रति एकड़ के हिसाब से संपर्क करें। जो कपास ड्रिप पर लगाई हुई है उसमें ड्रिप के माध्यम से ही पोषक तत्व दिए जाएं तो ज्यादा लाभदायक रहेगा।
जब दो तिहाई टिंडे पौधों पर तैयार हो जाए तो उसके बाद अपनी फसल में खुला पानी कभी न लगाएं। सिंचाई करनी भी पड़े तो ड्रिप या फव्वारा पद्धति के तहत ही पानी लगा सकते हैं। सिंचाई के अंतराल के समय को बढ़ा दिया जाए तो लाभदायक रहेगा। सितंबर माह में गुलाबी सुंडी का प्रकोप देखा जा सकता है। इसलिए अपने खेत का निरीक्षण समय-समय पर करते रहें। कीड़े का प्रकोप ज्यादा दिखाई दे रहा है तो ही कीटनाशकों का प्रयोग करें।
- कीड़े का अधिक प्रकोप हो तो ही करें कीटनाशकों का प्रयोग
इसके लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 800 मिलीलीटर की मात्रा 200 लीटर पानी प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं। अगर फसल में पैराविल्ट के लक्षण दिखाई देते ही 24 से 48 घंटों के अंदर 2 ग्राम कोबाल्ट क्लोराइड को 100 लीटर पानी में घोल बनाकर खेत में छिड़काव करें। पौधे सूख जाने पर दवा का असर नहीं होगा। इसके अलावा गुलाबी सुंडी की निगरानी के लिए 2 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाएं। इनमें फंसने वाले गुलाबी सुंडी के पतंगों को तीन दिनों के अंतराल पर गिनती करें। इस माह से अक्टूबर तक इनमें 24 पतंगे के प्रति ट्रैप तीन दिन में आते हैं तो कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता है।