रासीवासिया धर्मशाला में लोहड़ी पर्व पर झूमती युवतियां और महिलाएं।
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चरखी दादरी। जिले में पंजाबी समुदाय द्वारा वीरवार को लोहड़ी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। हालांकि कोेरोना संक्रमण के प्रसाद ने लोहड़ी के उल्लास को फीका कर दिया। गाइडलाइन के कारण सामूहिक रूप से कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया गया। परिवार के सदस्यों ने छोटे स्तर पर आयोजन कर त्योहार का जश्न मनाया। इस दौरान लोहड़ी के गीतों पर नृत्य कर एक-दूसरे को बधाई दी गई और मूंगफली-रेवड़ी का प्रसाद वितरित किया गया।
लोहड़ी पर्व का पंजाबी समुदाय में विशेष महत्व है। नई शादी अथवा बच्चे का जन्म होने पर त्योहार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। कोरोना के काबू में आने के बाद जिले में लोगों ने विशेष आयोजन की तैयारी कर ली थी लेकिन एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने से सामूहिक कार्यक्रमों को स्थगित करना पड़ा। ऐसे में जिले में पारिवारिक सदस्यों के बीच ही कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के जैन मौहल्ला, पाहवा चौक, सुभाष चौक व रासी वासिया धर्मशाला आदि क्षेत्रों में त्योहार का उल्लास नजर आया। कार्यक्रमों में सभी ने लोहड़ी के गीतों पर जमकर डांस किया और एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
रेलवे रोड और सुभाष चौक स्थित गुरुद्वारा में इस बार कोरोना के चलते बड़े आयोजन नहीं किए गए। हालांकि नवविवाहित जोड़ों ने यहां पहुंचकर प्रसाद चढ़ाया। इसके बाद लोहड़ी में अग्नि प्रवाहित की गई। श्रद्धालुओं को खील, मूंगफली व रेवड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। हन्नी, रमेश, सुमित्रा, बिट्टू, मंजीत और सरदार सिंह ने बताया कि इस बार कोरोना के कारण पर्व पर पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई।
एक दिन में एक लाख से अधिक की बिकी मूंगफली-रेवड़ी
शहर में मूंगफली की सात स्टॉलें अलग-अलग जगह लगीं। हालांकि लगभग सभी किराना स्टोर से भी मूंगफली की बिक्री हुई। एक स्टॉल धारक की मानें तो वीरवार को 100 किलोग्राम मूंगफली और 20 किलोग्राम रेवड़ी की बिक्री हुई। यदि पूरे शहर की बात करें तो एक लाख से अधिक की मूंगफली-रेवड़ी बिकने का अनुमान है।