चरखी दादरी। निजी अस्पताल संचालक जन्म के 24 घंटे के अंदर नवजात शिशु के टीकाकरण के लिए गंभीर नहीं है। उनकी इस लापरवाही पर अब जिला स्वास्थ्य विभाग कड़ा संज्ञान लेने जा रहा है। विभाग की योजना अनुसार करीब 20 दिन में अगर अस्पताल संचालकों ने अपना रवैया नहीं सुधारा तो उन्होंने प्रति शिशु 500 रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा। खास बात यह है कि यह नियम सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लागू होगा। टीकाकरण में ढिलाई बरतने वाले अस्पताल संचालकों को विभाग के एक सप्ताह के अंदर ही कारण बताओ नोटिस भी जारी करेगा।
बता दें कि टीकाकरण को लेकर हाल ही में सरकार ने नया आदेश पारित किया है। इसके अनुसार जन्म के 24 घंटे के अंदर नवजात शिशु को बीसीजी, ओपीवी और हेपेटाइटिस-बी का इंजेक्शन देना अनिवार्य है। जिला की अगर बात करें तो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 99 प्रतिशत नवजात शिशुओं को ये टीके लगाए जा रहे हैं जबकि निजी अस्पतालों में इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। विभाग के आंकड़ों अनुसार निजी अस्पताल में जन्म लेने वाले शिशुओं में से महज 9 प्रतिशत को बीसीजी, 29 प्रतिशत को ओपीवी और 34 फीसदी को हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाया जाता है। जबकि अगर जन्म के 24 घंटे के अंदर ओपीवी और हेपेटाइटिस का टीका लगाया जाना जरूरी है अन्यथा इससे अधिक विलंब होने पर ये दोनों टीके मिस ही हो जाते हैं।
शनिवार को सीएमओ डॉ. कृष्ण सिंह ने इस संबंध में निर्देश भी जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार के नए आदेश निजी और सरकारी दोनों स्वास्थ्य संस्थानों पर लागू होते हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नवजात का टीकाकरण मिस करता है तो उसके प्रभारी पर प्रति शिशु 500 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, अगर कोई निजी केंद्र जुर्माना लगाने के बाद भी ढिलाई बरतता है तो उसका डिलीवरी संबंधी लाइसेंस भी रद्द किया जाएगा।
एक सप्ताह बाद डीसी की अध्यक्षता में होगी बैठक
डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष मान ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर इस संबंध में डीसी प्रीति की अध्यक्षता में बैठक होगी। बैठक में आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) और नीमा (नेशनल इंटिग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन) के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक के दौरान ही टीकाकरण में ढिलाई बरतने वाले अस्पताल संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी होंगे और 15 दिन में सुधार न करने पर जुर्माने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जानिये...क्यों जरूरी हैं तीनों टीके
नवजात शिशु को बीसीजी का टीका टीबी से बचाव के लिए लगाया जाता है। यह टीका जन्म के कुछ दिन बाद भी लगा सकते हैं। इसके अलावा ओपीवी पोलिया से बचाव में सहायक है। वहीं, हेपेटाइटिस-बी का टीका हेपेटाइटिस से बचाव के लिए लगाया जाता है।
95 प्रतिशत है जिले में ओवरऑल टीकाकरण
दादरी जिले की अगर बात करें तो शिशुओं के टीकाकरण की ओवरऑल दर फिलहाल 95 प्रतिशत है। वहीं, जरूरी तीनों टीकाकरण की सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दर 99 प्रतिशत है। निजी अस्पताल जरूरी तीनों टीके लगाने में काफी पीछे हैं और इसका असर टीकाकरण के ओवरऑल प्रदर्शन पर पड़ रहा है। अहम बात यह है कि निजी अस्पताल संचालक नवजात शिशुओं का डाटा भी विभाग को नहीं दे रहे।
हर साल 8000 बच्चे लेते हैं जन्म
दादरी जिले की प्रति वर्ष होने वाली डिलीवरी की स्थिति देखें तो आठ हजार बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से करीब 5000 डिलीवरी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर और करीब 3000 डिलीवरी निजी अस्पतालों में होती है।
सरकार के नए आदेश हमें मिल चुके हैं। एक सप्ताह के अंदर इसे लेकर डीसी की अध्यक्षता में बैठक होगी और उसी दौरान निजी अस्पताल संचालकों को कारण बताओ नोटिस दिए जाएंगे। इसके बाद भी रवैया न सुधारने पर प्रति बच्चा 500 रुपये जुर्माना लगाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, चरखी दादरी