जैन स्थानक में प्रवचन करती गीता जी महाराज। स्रोत: विज्ञप्ति
चरखी दादरी। जैन स्थानक परिसर में आठ दिवसीय पर्युषण पर्व आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत वीरवार को विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। सुबह साध्वी वृद्धि महाराज ने श्री अंतगढ़ सूत्र का पाठ किया और शाम को सलोनी महाराज ने श्री कल्प सूत्र का पाठ किया। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान मांसाहार, हानिकारक गतिविधियों और हिंसात्मक व्यवहार से बचें।
आठ दिवसीय महापर्व के तहत 24 घंटे का जाप भी चल रहा है जबकि महिलाओं द्वारा रात्रि को जैन स्थानक परिसर में प्रतिक्रमण का पाठ भी किया जा रहा है। साध्वी गीता महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि जैन धर्म में पर्यूषण पर्व का बहुत महत्व है। संस्कृत शब्द पर्युषण का अर्थ होता है आत्मा के पास रहना। यह पर्व आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि व साधना का समय होता है। हमें अपने आहार, व्यवहार और वाणी में संयम रखना चाहिए और पर्युषण के दौरान आठ दिन तक उपवास, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, तप और प्रार्थना में लीन रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु पर्व के दौरान उपवास, एकासना (एक समय भोजन) व्रत और मौन साधना करते हुए हम पुण्य के भागी बन सकते हैं। वहीं बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी को इस आध्यात्मिक पर्व में भाग लेना चाहिए जिससे परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना हो सकें। पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन क्षमावाणी अथवा संवतसरी कहलाता है, जो इस पर्व का सबसे भावनात्मक पक्ष है। पर्युषण सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन के प्रति एक संवेदनशील दृष्टिकोण भी है। इसमें हमें सभी प्राणियों के प्रति दया, अहिंसा और सह-अस्तित्व की भावना को अपनाना चाहिए।