चरखी दादरी। जिले में पशु पॉलीक्लीनिक को सरकार ने आखिरकार मंजूरी दे दी है। पिछले पांच साल से ये योजना कागजों में लटकी हुई थी। पॉलीक्लीनिक गांव समसपुर में बनाए जाने की योजना है और इसके लिए तीन एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। पॉलीक्लीनिक बनने पर पशुओं की सर्जरी की सुविधा व बच्चेदानी का इलाज हो सकेगा। पशु पॉलीक्लीनिक में पांच विशेषज्ञों की टीम तैनात होगी।
चरखी दादरी जिला पशुपालन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। समय-समय पर होने वाली दुग्ध प्रतियोगिताओं में भी जिले के पशुपालक सक्रियता से भाग लेते रहे हैं। जिले में इस समय सभी कैटेगरी में 1.96 लाख पशु हैं। ऐसे में जब किसी पशु में किसी तरह की गंभीर बीमारी होती है तो उन्हें सर्जरी के लिए हिसार कृषि विश्वविद्यालय ले जाना पड़ता है। ऐसे में यह पॉलीक्लीनिक बनने से पशुओं और पशुपालकों को काफी राहत मिलेगी।
जिले के पशु अस्पतालों में लंबे समय से आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी बनी रही है। इनमें पशु विशेषज्ञों की तैनाती की जरूरत है। गांवों में 55 डिस्पेंसरी जरूर हैं लेकिन इनमें छोटे-मोटे रोगों के उपचार की ही सुविधा है। गंभीर मामला आने पर पशु को हिसार कृषि विश्वविद्यालय ले जाना पड़ता है। इससे पशुपालक को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इन डिस्पेंसरी में वीएलडीए तैनात होते हैं। संवाद
- गत वर्ष सरकार ने पॉलीक्लीनिक खोलने से किया था इन्कार
पिछले साल सरकार ने पंचकूला व चरखी दादरी में पॉलीक्लीनिक खोलने से इन्कार कर दिया था जबकि अन्य सभी जिलों में पॉलीक्लीनिक सुविधा है। इसके बाद पशुपालन विभाग ने चरखी दादरी में भी पॉलीक्लीनिक की जरूरत समझते हुए डीसी व डीडीओ को पत्र लिखा था। बाद में इसके लिए जगह का पेंच फंस गया था। शहर व आसपास के भागों में जगह नहीं मिलने की वजह से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
-ये सुविधाएं होती हैं पॉलीक्लीनिक में
पॉलीक्लीनिक खुलने से सर्जरी व बच्चादानी का विशेषज्ञ चिकित्सक भी तैनात होगा। जांच के लिए लैब की सुविधा मिल सकेगी। मेडिसिन का विशेषज्ञ चिकित्सक अलग से तैनात होगा। पॉलीक्लीनिक में पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा अधिकारियों के अन्य कई पद सृजित हो सकेंगे।
जिले में पॉलीक्लीनिक खोलने के लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है। गांव में तीन एकड़ जगह चिह्नित की गई है। अब जल्द ही शेष कागजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उसके बाद बजट का आकलन किया जाएगा। बजट के लिए फाइल तैयार कर मुख्य कार्यालय भेजी जाएगी।
-डॉ. जसवंत जून, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग