चरखी दादरी। मैंने पांच बार यूपीएस परीक्षा दी और पांचों प्रयास विफल रहे। इसके साथ दो बार एचसीएस की परीक्षा दी और एक बार तो 0.5 अंक के अंतर से चयन सूची से बाहर हो गई। दुख हुआ, लेकिन विफल प्रयास से भी कुछ नया की प्रेरणा ली। खुद की पहचान बनाने के उद्देश्य से दी गईं 9 परीक्षाओं में असफल रहीं, लेकिन मेरा दसवां प्रयास सफल रहा। ये कहना है ईपीएफओ में सहायक आयुक्त के पद पर चयनित हुईं गांव लाडावास निवासी अपर्णा का। उन्होंने कहा कि सहायक आयुक्त बनकर खुश हूं, संतुष्ट नहीं आईएस बनना मेरा सपना।
उनका कहना है कि यूपीएससी के छठे प्रयास और अपने अंतिम अवसर से उन्हें काफी उम्मीदे हैं। अपर्णा का कहना है कि अगले साल वो यूपीएससी परीक्षा में भाग लेंगी। हालांकि सहायक आयुक्त पद मिलने से उनकी कॅरिअर को लेकर चिंता कम हो गई है।
बता दें कि ईपीएफओ परीक्षा में लाडावास निवासी अपर्णा ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल कर दादरी जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश का नाम रोशन किया है। अपर्णा ने सिविल सर्विसेज व प्रतियोगी परीक्षाओं की विफलता के साथ पिता का देहांत जैसी असहनीय पीड़ा के दौर से गुजरना पड़ा। अपर्णा का कहना है कि पिता को खोने का दर्द उन्हें वर्ष 2022 में मिला। वहीं, परीक्षाओं की विफलता से भी थोड़ी विचलित हुई, लेकिन खुद को संभालते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर तैयारी जारी रखी। अब सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ने से वो कुछ हद तक खुद से संतुष्ट हैं। हालांकि अभी उनका अगला लक्ष्य अब यूपीएससी परीक्षा पर है।
पंजाब विश्वविद्यालय से की थी स्नातक
अपर्णा ने पंजाब विश्वविद्यालय से बीएससी रसायन शास्त्र विषय में की। उसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। उन्होंने बताया कि यूपीएससी के एक अटेंप्ट के साक्षात्कार में उसे 160 अंक मिले और अंतिम चयन सूची में शामिल होने से 10 अंकों से रह गईं। अपर्णा ने बताया कि जीवन सुरक्षित हो जाए इसे देखते हुए वो ईपीएफओ में सहायक आयुक्त की नौकरी करेंगी।
ये प्रयास रहे असफल
अपर्णा ने बताया कि उसने 5 बार यूपीएससी के अलावा दो बार एचसीएस की परीक्षा भी दी है। एक बार तो वो चयन सूची में 0.5 अंक से चूक गईं। इसके बाद उन्होंने सीआईएसएफ में सहायक कमांडेंट की लिखित परीक्षा भी पास की, लेकिन इसमें वो शारीरिक परीक्षा में पास नहीं हो सकी। इसके अलावा उन्होंने सीडीएस की परीक्षा भी पास की और इसमें वह साक्षात्कार प्रक्रिया में अंतिम दिन चयन से बाहर हो गई। अब अपर्णा को यूपीएससी की ईपीएफओ परीक्षा में दूसरी रैंक मिली है।
भिवानी रहता है परिवार, भाई है वकील
अपर्णा के पिता महाबीर सिंह का वर्ष 2022 निधन हो चुका है और उनकी मां सुनीता पशु डेयरी चलाती हैं। वहीं, अपर्णा के भाई अनुज वकालत करते हैं। उनका परिवार इस समय भिवानी में रह रहा है।
सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे युवा न खोएं धैर्य
अपर्णा कई बेटियों और उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं जो सिविल सर्विसेज या प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता से उम्मीद छोड़ देते हैं। अपर्णा का युवाओं को संदेश है कि विफलता से भी सीखें और खुद पर विश्वास बनाए रखें। लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयारी करें और तनाव को खुद पर हावी न होने दें। कॅरिअर जो पहचान देने का काम दो स्टेज में पूरा करें। पहली स्टेज में खुद को पहचान देने वाली जॉब में सफलता पाएं और दूसरी स्टेज में अपनी मुख्य लक्ष्य को पाने का प्रयास करें।