पशुपालन विभाग ने 45 इनुवेटर व 11 सुपरवाइजर की लगाई ड्यूटी, जिले में हैं करीब 1.98 लाख पशुधन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में सभी प्रकार की नस्लों के पशुओं की गणना का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए 45 इनुवेटर व 11 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। मौके से ही पशुओं का पूरा डाटा ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। 31 मार्च तक पशुगणना का काम पूरा होना है। जिले में 1.98 लाख पशु हैं। ये अलग-अलग श्रेणी के हैं। गणना कार्य पूरा होने के बाद नए आंकड़े सामने आएंगे।
पशुपालन विभाग 219 प्रकार की नस्लों की पशुगणना करने जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार पशुओं की गणना के आधार पर ही विभिन्न प्रकार की पशुओं से जुड़ीं नीतियां बनाती हैं। उसी के अनुरूप बजट तय किया जाता है। पशुओं की संख्या के आधार पर ही चिकित्सकों की भर्ती की जाती है। नए अस्पताल बनाए जाते हैं।
दूध उत्पादन में भारत प्रथम पायदान पर है। कृषि व पशुपालन व्यवसाय का परस्पर समन्वय है। किसान अतिरिक्त आय के लिए पशुओं का पालन करते हैं। दूध की बिक्री करते हैं। डेयरी व्यवसाय करते हैं। सरकार भी इसी उद्देश्य को लेकर सहकारी क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे रही है। डेयरी खोलने के लिए ऋण भी सस्ती ब्याज दर पर उपलब्ध करवाती है।
सरकार समय-समय पशु प्रदर्शनी व दुग्ध प्रतियोगिताएं भी आयोजित करती है। विजेता पशुपालकों को खासा पुरस्कार भी दिया जाता है। इतना ही नहीं सरकार अब गांव स्तर सहकारी समितियों की संख्या बढ़ा रही है। ताकि, सीमांत किसानों को भी पशु ऋण आसानी मिल सके। गांवों में मिल्क प्लांट व दूध से उत्पाद तैयार करने के लिए सहकारी केंद्र भी बनाने जा रही है।
- इन पशुओं की विभिन्न नस्लों की होगी गणना
जिले में विभिन्न प्रकार की पशु नस्ले हैं। इनमें खासकर गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट, कुत्ता, घोड़ा, बिल्ली, गधा व सूअर आदि शामिल हैं। देशभर में पशुओं की 219 प्रकार की नस्लें हैं। इन सभी श्रेणियों की गणना की जाएगी।
वर्सन:
विभाग ने पशुगणना का कार्य शुरू कर दिया हैं। गणना पूरी तरह से ऑनलाइन की जा रही है। कर्मचारी घर-घर जाकर पशुओं का पूरा विवरण दर्ज कर रहे हैं। इस डाटा को मौके से ही पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। 31 मार्च तक यह कार्य पूरा किया जाना है।
-डॉ. जसवंत जून, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग
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पशुपालक के घर बंधी भैंस। संवाद