चरखी दादरी। तीन दिन तक सर्वे करने के बाद नगर परिषद ने मंगलवार अलसुबह शहर में गोवंश पकड़ो अभियान शुरू किया। पहले ही दिन नगर परिषद टीमों ने शहर की सड़कों से 70 गोवंश पकड़े। एक दिन के अभियान में ही नंदीशाला फुल हो गई और अब यहां और गोवंश रखने की जगह नहीं बची है। इस स्थिति को देखते हुए ईओ सुमनलता ने गोशाला संचालकों की बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार बैठक में वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। नप अधिकारी गोशाला संचालकों को सांड़ रखने के लिए राजी करने का प्रयास करेंगे। शहर में इस समय 800 से अधिक गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं, जबकि नंदीशाला में रखे गए गोवंशों की तादाद करीब 250 है।
लंबे समय से शहर में लावारिस पशु आमजन के लिए परेशानी का सबब बने है। करीब एक सप्ताह पहले हुई रोड सेफ्टी की बैठक में लावारिस गोवंशों का मुद्दा उठा था। इस पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त प्रदीप गोदारा ने नगर परिषद ईओ सुमनलता और सचिव प्रशांत पाराशर को शहर से लावारिस गोवंश पकड़ने के आदेश दिए थे। बैठक के बाद कार्यालय पहुंचकर ईओ ने कर्मचारियों की बैठक लेकर शहर में लावारिस गोवंशों का सर्वे करने के आदेश दिए थे। गोवंश पकड़ो अभियान के लिए उन्होंने टीमें भी गठित की थी। उनके आदेशों का पालन करते हुए गत 27 अगस्त से नप टीमों ने रात के समय गोवंशों का सर्वे शुरू किया था। तीन दिन के सर्वे के दौरान कर्मचारियों को शहर की सड़कों पर तीन सौ से अधिक पशु घूमते मिले थे। सर्वे टीम ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी है और मंगलवार सुबह से गोवंश पकड़ो अभियान शुरू किया गया। अभियान के दौरान पकड़े गए गोवंशों को नंदीशाला में छोड़ा गया।
वहीं, संवाददाता ने मंगलवार दोपहर नंदीशाला पहुंचकर वहां की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान सामने आया कि नंदीशाला का संचालन एक संस्था कर रही है। 70 गोवंश पकड़ने के बाद यहां और गोवंश रखने की जगह नहीं बची है और इसकी जानकारी संस्था पदाधिकारी ईओ को दे चुके हैं। दूसरी ओर ईओ ने गोवंशों को रखने के लिए आड़े आ रही जगह की कमी को दूर करने के लिए गोशाला संचालकों की बैठक बुलाई है। नप सूत्रों के अनुसार बैठक में गोशाला संचालकों से गोवंश रखने का आग्रह किया जाएगा। अगर वो सहमति दे देते हैं तो अभियान में कोई अड़चन नहीं आएगी और अगर वो इंकार करते हैं तो फिर नप अधिकारियों के सामने गोवंशों को रखने के लिए जगह की व्यवस्था करना चुनौती होगी। हालांकि ईओ का कहना है कि गोवंशों से शहर को जल्द निजात दिला दी जाएगी और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
इन सड़कों से पकड़े गोवंश
गोवंश पकड़ने के लिए नप अधिकारियों ने दो टीमें गठित की हैं। इन टीमों ने मंगलवार सुबह साढ़े चार बजे से छह बजे तक गोवंश पकड़ो अभियान चलाया। पहले दिन रोहतक रोड, बस स्टैंड रोड, कोर्ट रोड, पुराना दिल्ली, पुराना झज्जर रोड और घिकाड़ा रोड से गोवंश पकड़े गए। इन्हें टीमों ने नंदीशाला में छोड़ दिया।
यहां है गोवंशों की ज्यादा समस्या
गोवंश की समस्या शहर के प्रत्येक वार्ड में है। वार्डों में गोवंशों की संख्या 600 से अधिक है। वहीं, 200 से अधिक गोवंश शहर के मुख्यमार्गों पर घूमते रहते हैं। शाम होते ही रोहतक रोड पर 50 से अधिक गोवंश आ जाते हैं जबकि ये ही हाल लोहारू और महेंद्रगढ़ रोड का है। इसके अलावा शहर के बाजारों में भी लोग और दुकानदार गोवंशों की समस्या से परेशान हैं।
गोवंशों के चलते चार साल में तीन लोग गंवा चुके जान
पिछले चार सालों की अगर बात करें तो जिले में गोवंशों के चलते चार सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें तीन लोगों की मौत हुई है। करीब ढाई साल पहले महेंद्रगढ़ चौक के समीप हुए हादसे में घसोला निवासी एक व्यक्ति की मौत हुई थी। वहीं, बाढड़ा क्षेत्र के एक गांव में मां का खाना लेकर जा रही महिला के पेट में गोवंश ने सिंग घुसा दिया था और महिला का पीजीआई में ऑपरेशन हुआ था। वहीं, करीब डेढ़ साल पहले दादरी-दिल्ली रोड पर गोवंश सामने आ जाने से बाइक सवार की मौत हुई थी। करीब एक साल पहले रामनगर के समीप गोवंश आ जाने के कारण स्विफ्ट गाड़ी पलट गई थी और उस हादसे में 20 लोग घायल हुए थे।
70 गोवंश हमने शहर से पकड़े हैं। अभियान नियमित जारी रहेगा और जल्द ही गोवंश रखने के लिए हम जगह की वैकल्पिक व्यवस्था कर देंगे। जरूरत पड़ी तो प्रशासन की भी मदद लेंगे। मैंने गोशाला संचालकों को बैठक के लिए बुलाया है और जल्द ही जगह की अड़चन का समाधान कर दिया जाएगा।
सुमनलता, ईओ, नगर परिषद