चरखी दादरी। जिले में 13 पशु चिकित्सकों की कमी से पशु उपचार व्यवस्था दम तोड़ रही है। जिलास्तर पर पशु चिकित्सकों के 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय 19 ही तैनात हैं। सरकार जिले में पशु पॉलीक्लिनिक खोलने से पहले ही इंकार कर चुकी है, जबकि चिकित्सकों की कमी का असर पर भी सेवाओं पर पड़ रहा है। जिले में 38 हजार गाय और 152521 भैंस हैं। इनके अलावा अन्य कैटेगरी के भी पशु हैं।
जिले का राजकीय पशु अस्पताल 1960 में बना था, तब से लेकर अस्पताल उसी रूप में ही चला आ रहा है। अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि आबादी बढ़ने के साथ-साथ पशुआें की संख्या व उनमें खानपान की वजह से बीमारियों का दायरा भी लगातार बढ़ा है।
वहीं, सभी प्रकार के पशुओं की संख्या के आधार पर ही विभाग प्लानिंग तैयार करता है। सभी सरकारी स्कीमों की प्लान संख्या के अनुसार ही तैयार की जाती हैं। पशु गणना से पशुओं का पूरा डाटा तैयार होता है। पशु गणना के अनुरूप ही नए पशु अस्पताल खोले जाते हैं। पशु चिकित्सकों की भर्ती भी पशु संख्या के अनुपात में ही की जाती है ताकि सभी पशुओं की बीमारियों पर भी साथ- साथ अंकुश लगाया जा सके।
आजकल पशुओं में नित नए रोगों को बढ़ावा मिल रहा है लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढने की वजह से पशुपालकों को समय- समय पर काफी दिक्क्तें झेलनी पड़ रही हैं। पशु की हानि से पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। पशुपालन विभाग ने इसी वर्ष डिजिटल पशु गणना भी करवाई है। पशु गणना 2012 के बाद अब 2021 में हुई है। इसके लिए वीएलडीए व चिकित्सकों की डयूटी लगाई गई थी। अलग अलग टीमों ने घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी जुटाई थी। इस गणना के लिए 87 वीएलडीए चिकित्सकों को काम सौंपा गया था। जिला में गाय, भैंस, मछली, बकरी, गधा, घोड़ा, खच्चर, कुत्ता व सुअर आदि शामिल हैं। अब जिला में 13 पशु चिकित्सकों की कमी बनी हुई है जिससे समय पर उपचार होने में देरी हो जाती है। जिला में पशु चिकित्सकों के 32 पद स्वीकृत है जबकि इस समय 19 ही तैनात हैं। यह सभी वैटेरनरी सर्जन हैं। शहर के अस्पताल के अलावा गांवों में पशु औषद्यालय व पशु डिस्पेंसरी खोली हैं
जल्द ही पशु चिकित्सकों की कमी पूरी होगी। सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विभिन्न योजनाएं चला रही है। पशुओं के उपचार के लिए सरकार गंभीर है।
-तुलसीराम, एसडीओ, पशुपालन विभाग