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Charkhi Dadri News: चार एमएम बारिश से बदला मौसम का मिजाज

Wed, 18 Jun 2025 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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मंगलवार दोपहर बारिश के दौरान शहर के बस स्टैंड रोड से गुजरते राहगीर। संवाद
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फोटो 31
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मंगलवार दोपहर बारिश के दौरान शहर के बस स्टैंड रोड से गुजरते राहगीर। संवाद
- मंगलवार दोपहर 30 मिनट तक हुई बारिश, अधिकतम तापमान 33 तो न्यूनतम दर्ज किया गया 27 डिग्री
संवाद न्यूज एजेंसी



चरखी दादरी। क्षेत्र में मंगलवार को दोपहर बाद चार एमएम बारिश हुई जबकि इससे पहले सुबह से ही बादलों के आने-जाने का क्रम बना रहा। वहीं, हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। सोमवार के मुकाबले अधिकतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।

सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 34 व न्यूनतम 28 दर्ज किया गया था जबकि मंगलवार को अधिकतम 33 व न्यूनतम 27 डिग्री रहा। हवा की गति 11 किलोमीटर प्रति घंटा रही। वहीं, वातावरण में नमी की मात्रा 79 प्रतिशत पहुंच गई।
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सुबह ही आसमान में बादल छाए रहे। बीच में धूप भी खिली। दिन के समय उमस भरी गर्मी बनी रही। दोपहर बाद मौसम में बदलाव आया और चार एमएम बारिश दर्ज की गई। इससे मौसम खुशगवार हो गया। लोगों को गर्मी से राहत मिली। अब वातावरण से गर्म हवा व तपिश गायब हो गई है।



मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि शुक्रवार तक इसी प्रकार बूंदाबांदी एवं बारिश जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि उसके बाद 19 जून को फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 23 जून तक तेज गति की हवा के साथ बारिश होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इस समय बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे मानसून को गति मिल रही है।
वहींं, बारिश से कपास, बाजरा, ज्वार व सब्जी की फसलों को फायदा पहुंच रहा है। अभी काफी किसानों ने बाजरे की बिजाई नहीं की है। कुछ किसानों ने मई माह में हुई बारिश में बिजाई कर दी थी। अभी बाजरा व ग्वार की बिजाई का समय बचा है। किसान 15 जुलाई तक बाजरा व ग्वार की बिजाई कर सकते हैं।
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- स्वास्थ्य के प्रति न बरतें लापरवाही
चिकित्सकों का मानना है कि बारिश के मौसम में बीमारियाें से बचाव करना चाहिए। पानी में विभिन्न प्रकार के मच्छर पनपते हैं। इससे बीमारियों का अंदेशा बना रहता है। एनाफ्लीज मादा मच्छर, डेंगू व डेंगी मच्छरों की वजह से बुखार के मामले ज्यादा बढ़ते हैं। इस बुखार में प्लेटलेट्स व खून की मात्रा कम होने पर मरीज की हालत खराब हो जाती है। चिकित्सकों की आम लोगों से सलाह है कि अपने आसपास पानी का लंबे तक ठहराव न होने दें।
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