चरखी दादरी। जिले के 58 में से 20 जलघर ऐसे जिनकी आपूर्ति पूरी तरह नहरी टर्म पर निर्भर है। नहरी पानी खत्म होते ही इन जलघरों की पेयजल आपूर्ति बंद हो जाती है। हर गर्मी के सीजन में इन जलघरों से जुड़े करीब एक लाख लोग पेयजल संकट झेलते हैं। गर्मी सीजन में पानी की बढ़ती खपत को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग को अभी से इस पर काम करने की जरूरत है। इतना ही नहीं विभागीय अधिकारियों को सभी मोटरें व पंप सेट भी अपडेट करने चाहिए।
जलघरों में पानी खत्म होने पर विभाग के पास विकल्प होना चाहिए। इस समय करीब 20 जलघरों के टैंकों को नहरी पानी से भरने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। इन जलघरों मेें नहरी पानी खत्म होते हुए पेयजल सप्लाई ठप हो जाती है। वैसे भी जलघरों के वाटर टैंकों में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है जबकि गर्मियों के समय नहरों में 24 दिन बाद और सर्दी के मौसम में 15 दिनों में पानी छोड़ा जाता है।
- शहर में होती है एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति
जिला में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। जल जीवन मिशन योजना पर कार्य तो शुरू है लेकिन धीमा चल रहा है। इस समय शहर सहित पूरे जिले में एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई की जा रही है जबकि सप्लाई प्रतिदिन करने का प्रावधान है। जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर के दोनों जलघर परिसर में 12 बोरिंग ट्यूबवेल लगा रखे हैं और जब जलघर में नहरी पानी खत्म हो जाता है तो उस अवस्था में ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाती है।
- जलघरों में बोरिंग है विकल्प
इस समय जिला में 20 ऐसे जलघर हैं जहां बोरिंग ट्यूबवेल नहीं है। ऐसे में इन जलघरों के अधीन आने वाले करीब 35 गांवों में पानी का संकट बना रहता है। इन जलघरों में नहरी पानी 10 से 12 दिन में ही खत्म हो जाता है। उसके बाद विभाग के पास पेयजल का विकल्प नहीं बचता है। ऐसे में इन जलघर परिसर में भी बोरिंग ट्यूबवेल लगाने की सख्त जरूरत है ताकि पानी का संकट न बनने पाए।
- ढाणी फौगाट के ग्रामीण खरीदकर पी रहे पानी
गांव ढाणी फौगाट स्थित जलघर परिसर में बोरिंग ट्यूबवेल की व्यवस्था नहीं होने से यहां पेयजल संकट बना रहता है। गांव की आबादी करीब 10 हजार है और लोगों को 400 रुपये में पानी का टैंकर खरीदना पड़ता है। गर्मियों के मौसम में दस दिन के अंदर दो टैंकर की खपत होगी और इसे लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण सोमबीर, गोविंद, माडूराम, मुकेश का कहना है कि जलघरों के परिसर में बोरिंग ट्यूबवेल की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि पानी का संकट न हो।
गर्मी सीजन को देखते हुए अभी से सतर्क हो गया है। नई पेयजल लाइनें भी बिछाई जा रही हैं। जलघरों की पेयजल स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। मरम्मत भी करवाई जा रही है।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग