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Chandigarh-Haryana News: आशियाना गंवाने वालों को हाईकोर्ट से 25 साल बाद इंसाफ, मिलेगा मुआवजा

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-पब्लिक हेल्थ विभाग की बिछाई पाइप लाइनों से गिर गई थी दो घरों की दीवार
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-निचली अदालतों ने माना था सरकार को लापरवाह, सरकार की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। गोहाना के गांव के दो घरों के गिरने के लिए अपनी जिम्मेदारी को चुनौती देने के 25 साल बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह कहते हुए इस विवाद का निपटारा कर दिया कि यह सीधे तौर पर सरकार की लापरवाही का नतीजा था। आशियाना गंवाने वालों को मुुआवजे के आदेश को बरकरार रखते हुए बेंच ने 2001 में दायर एक रेगुलर दूसरी अपील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य की लापरवाही ठोस और बिना किसी खंडन वाले सबूतों पर आधारित थी।
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1993 में बलबीर सिंह ने घर के गिरने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए 2 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। यह मुआवजा गोहाना तहसील के बिचपरी गांव में उनके दो घरों की दीवारें पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की बिछाई गई पीवीसी पाइपलाइन से कथित तौर पर लीकेज की वजह से गिर गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 1999 में इस केस का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार की लापरवाही के कारण हुआ था। क्योंकि सरकार ने शिकायतों के बावजूद लीक हो रही सप्लाई लाइनों को ठीक नहीं किया। जस्टिस दीपक गुप्ता ने फैसला सुनाया कि लापरवाही साइट प्लान, गवाहों के बयानों और बार-बार की शिकायतों पर कार्रवाई करने में अधिकारियों की मानी हुई नाकामी जैसे ठोस सबूतों पर आधारित है। ट्रायल कोर्ट ने 14 अगस्त, 1999 के फैसले के तहत 2,00,000 रुपये का मुआवजा, 12 परसेंट सालाना ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था। राज्य की पहली अपील एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने 17 अक्टूबर, 2000 को खारिज कर दी थी, जिसके बाद राज्य ने 2001 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने यह नतीजा निकला कि निचली अदालतों का फैसला कानून के सही इस्तेमाल पर आधारित था।
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