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गैंगस्टर भट्टी के निशाने पर पंजाब: इस मॉड्यूल पर ISI के लिए कर रहा काम, सोशल मीडिया को बनाया सबसे बड़ा हथियार

Tue, 18 Aug 2026 07:51 AM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

शहजाद भट्टी का काम करने का तरीका पूरी तरह से डिजिटल और मॉड्यूल-बेस्ड है। भट्टी छोटे गैंगस्टरों को अपराध की दुनिया में बड़ी पहचान मिलने का लालच देकर उनसे बड़े काम करवाता है।
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पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पंजाब में शहजाद भट्टी ने गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ को मजबूती से खड़ा कर दिया है। यही गठजोड़ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी के चलते एजेंसियों ने स्थानीय पुलिस की मदद से भट्टी के स्थानीय नेटवर्क पर चोट करते हुए सूबे से करीब 44 गुर्गों को हिरासत में लिया है।
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सुरक्षा एजेंसियां भट्टी के नेटवर्क को ‘क्राइम-टेरर हाइब्रिड मॉडल’ मान रही हैं। भट्टी ने स्थानीय युवाओं, अपराधी तत्वों और छोटे मॉड्यूलों को जोड़कर इस मॉडल को मजबूती दी है। इतना ही नहीं सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्र तो भट्टी गैंग के नेटवर्क के तार तहरीक-एक-तालिबान (हिंदुस्तान) मॉड्यूल से भी जुड़े बताते हैं। 

पंजाब में भट्टी सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को गुमराह करता है और स्थानीय गैंग व अपराधी तत्व भी इसी के जरिये भट्टी से जुड़ रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिये स्थानीय गुर्गों की भर्ती का खेल भट्टी अभी भी खेल रहा है। दरअसल, पंजाब में भट्टी का नेटवर्क साल 2025 में कई घटनाओं के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर आया। मार्च 2025 में जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले की जांच में उसका नाम उभरा। 
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नवंबर 2025 में गुरदासपुर सिटी पुलिस थाने के बाहर ग्रेनेड हमले के मामले में भी दिल्ली पुलिस ने उसके मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें पंजाब का हरगुनप्रीत सिंह भी शामिल था। जांच में सामने आया कि भट्टी विदेश में बैठकर आरोपियों को निर्देश देता था।
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गैंग की तरह काम नहीं करते गुर्गे
भट्टी पंजाब को दहलाने और यहां का माहौल खराब करने के लिए जिस तरह से काम कर रहा है, वह थोड़ा अलग है। पंजाब में भले ही वे गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ बनाने में कामयाब हो गया है मगर उसके गुर्गे एक पारंपरिक गैंग की तरह काम नहीं करते। पुलिस सूत्र बताते हैं कि भट्टी अलग-अलग स्थानीय अपराधियों, छोटे गैंगस्टरों और अन्य युवाओं को सोशल मीडिया के जरिये काम सौंपता है। कुछ राशि उन तक एडवांस पहुंच जाती है और बाकी काम होने के बाद। यानी पाकिस्तान में बैठा भट्टी पंजाब में स्थानीय गुर्गों के नेटवर्क और पहले से तैयार मौजूदा अपराधी ढांचे का इस्तेमाल कर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देता है।

अपराध की दुनिया में पहचान का लालच
पुलिस सूत्र बताते हैं कि भट्टी छोटे गैंगस्टरों को अपराध की दुनिया में बड़ी पहचान मिलने का लालच देकर उनसे बड़े काम करवाता है। इसके अतिरिक्त स्थानीय गुर्गों को रुपयों और विदेश भेजने का लालच तो दिया ही जाता है। नई भर्ती के बाद स्थानीय युवाओं से रेकी, सूचना जुटाने, धमकी, हथियार पहुंचाने और हमलों जैसे काम करवाता है।

एन्क्रिप्टेड ऐप्स का सहारा
शहजाद भट्टी का काम करने का तरीका (मोडस अपरेंडी) पूरी तरह से डिजिटल और मॉड्यूल-बेस्ड है। वह इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिये पंजाब के युवाओं को पैसों का लालच देकर भर्ती करता है। शूटर और लॉजिस्टिक्स संभालने वालों को एक-दूसरे के बारे में भनक तक नहीं होती। वारदात को अंजाम देने के बाद वीडियो रिकॉर्ड कर भट्टी को भेजा जाता है, जिसे वह सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दहशत फैलाता है और व्यापारियों से मोटी रंगदारी वसूलता है।

विदेश में बैठा गोल्डी भी चुनौती
शहजाद भट्टी के साथ-साथ गोल्डी बराड़ भी पंजाब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि उसका नेटवर्क विदेश में बैठे हैंडलर और पंजाब में सक्रिय स्थानीय गुर्गों के मॉडल पर काम करता है। पुलिस के सामने चुनौती केवल बराड़ को गिरफ्तार करने की नहीं बल्कि उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है। जनवरी 2026 में लुधियाना पुलिस ने बराड़ से कथित तौर पर जुड़े एक अंतरराज्यीय वसूली और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। बराड़ का नाम सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में प्रमुख आरोपी के तौर पर सामने आया था।
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