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Chandigarh-Haryana News: यमुना की सफाई में अब गांवों पर भी फोकस

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- नदी किनारे बसे गांवों में थ्री-पोंड सिस्टम और छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगेंगे
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- 13 जल स्रोतों का 2027 तक कायाकल्प का लक्ष्य

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की योजना अब शहरों से निकलकर नदी किनारे बसे गांवों तक पहुंचेगी। सोनीपत, पानीपत और करनाल के यमुना किनारे के गांवों में घरेलू सीवेज के निस्तारण के लिए थ्री-पोंड सिस्टम और छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। मंगलवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यमुना से जुड़े आठ जिलों की परियोजनाओं की प्रगति देखी गई।

गांवों के साथ यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया गया। फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 जल स्रोत कुल 19.12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पुनरुद्धार के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें प्रदूषण की मुख्य वजह घरेलू सीवेज सामने आई है। इनके पुनरुद्धार का काम 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार की क्षमता बढ़ाने के लिए गुरुग्राम में धनवापुर और बहरामपुर में 100-100, नौरंगपुर में 40 और सेक्टर-107 में 100 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित हैं। फरीदाबाद के मिर्जापुर में 20 एमएलडी संयंत्र का काम 30 अगस्त तक शुरू करने और सूरजकुंड परियोजना की तकनीकी निविदा 24 अगस्त तक खोलने का लक्ष्य है। कुंडली और समालखा में भी ट्रीटमेंट प्लांट का काम प्रक्रिया में है।
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औद्योगिक कचरे के उपचार के लिए फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी साझा संयंत्र का टेंडर हो चुका है। गुरुग्राम सेक्टर-34 में 20 एमएलडी संयंत्र की तकनीकी निविदा खुल चुकी है। बादशाहपुर और सेक्टर-37 की परियोजनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा 33 शहरी निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन पर काम होगा। 27 के 22 वर्ष के अनुबंध हो चुके हैं। सोनीपत, फरीदाबाद और यमुनानगर में कुल 650 टन प्रतिदिन क्षमता के तीन बायोगैस संयंत्र भी प्रस्तावित हैं।
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