रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के समय पीएचसी में चिकित्सक मौजूद नहीं था। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था होने के बावजूद निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। नवजात को तत्काल पुनर्जीवन संबंधी चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन इस दौरान टीकाकरण में समय व्यर्थ हुआ।
भिवानी के नकीपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रसव के बाद नवजात की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।
विज्ञापन
आयोग ने संबंधित स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और शोकाकुल परिवार को आर्थिक मुआवजा देने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा है।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली आयोग की पूर्ण पीठ ने जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए ये निर्देश जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के समय पीएचसी में चिकित्सक मौजूद नहीं था। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था होने के बावजूद निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
विज्ञापन
जांच में यह भी सामने आया कि नवजात को विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू), भिवानी लाया गया, जहां उसे मृत अवस्था में पहुंचा घोषित किया गया। बोर्ड के अनुसार, नवजात को तत्काल पुनर्जीवन संबंधी चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन इस दौरान टीकाकरण में समय व्यर्थ हुआ।
आयोग ने कहा कि केवल विभागीय कार्रवाई से परिवार को हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। इसलिए मुआवजे पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
एफआईआर की जांच तेज करने के निर्देश
आयोग ने भिवानी के पुलिस अधीक्षक को भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत दर्ज एफआईआर की जांच में तेजी लाने और स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी, 2027 को होगी।