हरियाणा राज्य सेवा आयोग ने दिया पांच हजार मुआवजा और वसूला गया ब्याज लाैटाने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सेवा आयोग ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की है कि इसरो को 3.8 लाख किलोमीटर दूर चंद्रमा तक पहुंचने में भी इतना समय नहीं लगा जितना एचएसवीपी को एक साधारण भुगतान सत्यापन करने में लग गया। आयोग ने इस मामले को गहरी प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बताया और संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये मुआवजा और वसूला गया विलंबित ब्याज लौटाने का आदेश दिया है।
आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि मामला 2019 में एक आवंटी के भुगतान राशि की पुष्टि से जुड़ा है। भुगतान होने के बावजूद छह साल तक सत्यापन लंबित रहा और शिकायतकर्ता को न तो कब्जा प्रस्ताव मिल सका और न ही रजिस्ट्री (कन्वेयंस डीड) हो पाई। आयोग ने आदेश में कहा कि 2017 के बाद एचएसवीपी ने मूल भुगतान रसीदें मांगना बंद कर दिया था और ऑनलाइन रिकॉर्ड को ही मान्यता देना शुरू किया था। ऐसे में आवंटी से बार-बार रसीदें मांगना और सत्यापन को लंबित रखना न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि शिकायत निवारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आयोग ने निर्देश दिया कि भविष्य में यदि ऐसी लापरवाही सामने आई तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि समय पर भुगतान करने के बावजूद उस पर विलंबित ब्याज वसूला गया। इस पर आयोग ने ईओ फरीदाबाद को उक्त ब्याज राशि 3 अक्तूबर तक शिकायतकर्ता को लौटाने और विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि जनता को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।