चंडीगढ़। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के तहत राज्य और प्रत्येक जिले में मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड के गठन के आदेश के बावजूद हरियाणा सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
दो साल पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया था कि सभी जिलों में मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड के गठन की दिशा में कार्रवाई करे। कोर्ट ने अप्रैल 2023 में याचिका का निपटारा कर दिया था, लेकिन दो साल बाद भी राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की। ऐसे में याचिकाकर्ता अंशुल मंगला ने पुन: हाई कोर्ट से मामले में सुनवाई की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायाधीश सुमित गोयल की खंडपीठ ने याची को इस विषय में नए सिरे से याचिका दायर करने की सलाह दी।
मंगला ने कोर्ट को अवगत कराया कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के तहत प्रत्येक राज्य को मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करने, उपचार और पुनर्वास के लिए न केवल राज्य स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण बनाना अनिवार्य है, बल्कि जिलों में समीक्षा बोर्डों का गठन भी आवश्यक है। इसके बावजूद हरियाणा में समीक्षा बोर्ड का गठन नहीं हुआ है।