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सेवा से असंबंधित आपराधिक मामला, पेंशन व ग्रेच्युटी रोकना गलत: हाईकोर्ट

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मृतक कर्मी की 73 वर्षीय कैंसर पीड़िता पत्नी को मिलेगा बकाया ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन
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हाईकोर्ट ने बकाया का भुगतान करने के लिए हरियाणा सरकार को दी तीन माह की मोहलत


चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी के सेवा से असंबंधित आपराधिक के आधार पर उसकी ग्रेच्युटी और पेंशन के लाभ रोके नहीं जा सकते है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया कि मृत कर्मचारी की पत्नी को तीन माह के भीतर ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन के सभी बकायों का भुगतान करे, साथ ही याचिका दाखिल करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे।


याचिका अंबाला निवासी महिला ने दायर की थी। इनके पति 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था और 2013 में उसे पांच वर्ष की सजा सुनाई गई। लेकिन 2018 में उसे उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया। इसके बावजूद, सरकार ने सेवा लाभ यह कहते हुए रोके रखे कि वह सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी। इस बीच कर्मचारी की मृत्यु हो गई।
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हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने वास्तव में सभी अभियुक्तों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है, किसी मृत व्यक्ति के सेवा लाभ को नहीं रोका जा सकता। मृत व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। कोर्ट ने इस बात को रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता की उम्र 73 वर्ष है और वह कैंसर से पीड़ित हैं।
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इस परिस्थिति में उन्हें ग्रेच्युटी से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने कहा कि यह निष्कर्ष सुरक्षित रूप से निकाला जा सकता है कि आपराधिक कार्यवाही कर्मचारी की सरकारी ड्यूटी से संबंधित होनी चाहिए। यदि कोई अपराध पूरी तरह से सेवा से असंबंधित है तो उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सेवा अवधि के दौरान गंभीर कदाचार हो तभी यह नियम लागू होता है। यदि हत्या या बलात्कार जैसा अपराध घर पर होता है और उसका सेवा से कोई संबंध नहीं है तो वह नियम की परिधि में नहीं आएगा।
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