अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में ई-नीलामी के माध्यम से प्लाॅट पाने वालों के प्लाॅट रद्द किए गए थे। अब वह फिर से रिहायशी प्लाॅट पा सकेंगे। एचएसवीपी की इस योजना का लाभ उन्हीं प्लाॅट मालिकों को दिया जाएगा जोकि कम से कम 15 प्रतिशत रकम जमा करा चुके हैं। अब शेष रकम 18 प्रतिशत ब्याज के साथ जमा करानी होगी।
एचएसवीपी की तरफ से ई-नीलामी के माध्यम से प्लाॅट बेचे जाते हैं। एचएसवीपी के नियमों के अनुसार ई-नीलामी की नीतियों में प्रावधान था कि यदि बोली के अनुसार प्लॉट की लागत का 75 प्रतिशत किसी भी कारण से निर्धारित समय के भीतर जमा नहीं किया जाता है तो आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) स्वत: ही रद कर दिया जाएगा और जमा राशि को जब्त कर लिया जाएगा। इसलिए 75 प्रतिशत राशि जमा न करने के कारण 6 जुलाई 2020 के बाद समय-समय पर आयोजित ई-नीलामी से बेचे गए बड़ी संख्या में प्लॉट रद्द कर दिए गए थे। इस कारण ऐसे लाभार्थी एचएसवीपी में अनुरोध करके दोबारा से रकम वापसी या प्लाॅट देने की मांग कर रहे थे। एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे की तरफ से इस प्रकरण में नियम-शर्तों को लेकर अधिकारिक पत्र जारी किया गया है और यह भी कहा है कि एमनेस्टी योजना पात्र बोलीदाताओं के लिए एक अंतिम अवसर है। यदि कोई बोलीदाता इसका लाभ उठाने में विफल रहता है तो फिर इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
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इन बोलीदाताओं को मिलेगा योजना का लाभ
जो बोलीदाता 22 जून 2021 से 31 मार्च 2023 की अवधि के दौरान ई-नीलामी के माध्यम से बेचे गए प्लॉटों की राशि जमा नहीं करा सके हैं उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। पहले इन्हें 10 फरवरी 2023 और 3 मई 2023 को 18 प्रतिशत की दर से ब्याज और विलंब शुल्क जमा कराने के लिए कहा था जिससे आवासीय प्लाॅट पाने के लिए दोबारा से माैका मिल सके। कई मामले कोर्ट भी पहुंच गए। एचएसवीपी की शर्तों के अनुसार, इस योजना का लाभ ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े लाभार्थियों को नहीं मिलेगा।