हरियाणा में नशे को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनएसबी) ने 860 कुख्यात नशा तस्करों की सूची तैयार की है, जिन पर पिछले 10 वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत तीन या उससे अधिक केस दर्ज हैं। इनमें से 730 जेल से बाहर हैं और 380 अब भी सक्रिय हैं। ये सभी जमानत मिलने या फिर केस की सुनवाई में देरी का फायदा उठाकर तस्करी करते आ रहे हैं। एनसीबी ने इस सूची को सभी जिला और फील्ड पुलिस यूनिट्स से साझा कर तत्काल कार्रवाई करने और जांच में तेजी लाने को कहा है।
एनसीबी प्रमुख व डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि यह सामान्य सूची नहीं है। पुलिस इसे ऑपरेशनल टूल की तरह इस्तेमाल करेगी। यह एक तरह का लाइव ट्रैकर है, जिसे लगातार अपडेट किया जाएगा। इसका उपयोग केवल तस्करों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इससे पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा। 468 तस्करों को अभी निष्क्रिय की सूची में रखा गया है लेकिन इन सभी पर भी पुलिस की नजर रहेगी।
गाैरतलब है कि अमर उजाला ने हरियाणा में नशे के खिलाफ युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद सरकार ने तस्करों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसी क्रम में अब समस्या की असली जड़ की पहचान कर कुख्यात तस्करों की सूची जारी की गई है।
साइबर फॉरेंसिक लैब से कहा-जांच जल्द करें ताकि तस्कर बच न सकें
किस तस्कर के खिलाफ कितने केस हैं, काैन जेल से बाहर है और अब तक किस पर क्या-क्या कार्रवाई हुई, उसका पूरा विवरण सूची में है। एनसीबी ने साइबर फॉरेंसिक लैब को निर्देश दिया कि वह तस्करी के केसों की जांच कर रहे अधिकारियों को प्राथमिकता पर सहयोग दें, ताकि नशा बेचने वालों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।
सिरसा में सबसे ज्यादा तस्कर
सिरसा, फतेहाबाद और यमुनानगर सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। अकेले सिरसा में 117 तस्कर सूचीबद्ध हैं, जिनमें से 106 जेल से बाहर हैं।
पुलिस तस्करों पर ले ये एक्शन
- जेल में बंद तस्करों से मिलने आने वालों की निगरानी होगी।
- केस से जुड़ी रिपोर्ट ई-ट्रिब्यून पोर्टल पर तुरंत अपलोड होगी ताकि केस लगातार ट्रैक किया जा सके।
- तस्करों की संपत्ति की जांच कर उसे अर्जित करने में नशा तस्करी का आधार मिलने पर जब्त किया जाएगा।
- तस्कर और कितने व किन मामलों में आरोपी रहा है, उसे साथ में जोड़ा जाएगा।
- पिट-एनडीपीएस के तहत केस दर्ज होगा। इसमें एक साल तक जमानत नहीं मिलती।
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