हरियाणा के 45 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं पर करीब 4800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ने जा रहा है। प्रदेश में 48 से 54 पैसे प्रति यूनिट बिजली की दर बढ़ सकती है। यह फैसला हरियाणा बिजली नियामक आयोग दो दिन में कर सकता है।
आयोग के पास हरियाणा बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल), हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएन) ने वर्ष 2013-14 के लिए अपनी सालाना राजस्व जरूरत (एआरआर) दायर कर रखी हैं। आयोग ने इन एआरआर पर फैसला जल्द सुनाना है।
एचजीपीसीएल ने बिजली बेचने की दर महंगी करने का आग्रह किया है। इसके लिए कोयला महंगा होना आधार बताया गया है। यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन (वितरण कंपनियों) ने बिजली महंगी करने का आग्रह किया। इसके लिए एचपीजीसीएल की महंगी बिजली और केंद्रीय योजनाओं से मिलने वाली महंगी बिजली की दलील दी है।
वितरण कंपनियों ने वर्ष 2011-12 के लिए करीब 2400 करोड़ रुपये का फ्यूल सरचार्ज एरियर (एफएसए) वसूलने का आवेदन कर रखा है। यह राशि आयोग ने दो साल के भीतर वसूलने का आग्रह किया है। इसके अलावा करीब 2400 करोड़ रुपये की राशि रेगुलेटरी असेट (कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और निगमों की संपत्ति) पर हुए खर्च की वसूली मांगी है। यह राशि दो साल के भीतर वसूलने का आग्रह किया गया है।
एफएसए के दो साल के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट और रेगुलेटरी असेट के लिए दो साल के भीतर वसूलने के लिए 25 पैसे प्रति यूनिट वसूलने को कहा है। दोनों वितरण कंपनियों के राजस्व में अगले साल के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये का अंतर है जिसे कर्ज लेकर पूरा किया जाएगा। इस कर्ज की भी मंजूरी मांगी है।
तीन साल तक वसूली
सूत्रों के मुताबिक आयोग वितरण कंपनियों के 2400 करोड़ रुपये बतौर एफएसए दो साल के बजाय तीन साल के भीतर वसूलने का आदेश दे सकता है। इसलिए 50 पैसे के बजाय यह बोझ थोड़ा कम हो जाएगा। इसी तरह रेगुलेटरी असेट की 2400 करोड़ रुपये की राशि तीन साल तक वसूलने का आदेश दे सकता है। कुल मिलाकर 48 से 54 पैसे प्रति यूनिट बिजली का रेट बढ़ सकता है। इससे वितरण कंपनियों को करीब 800 करोड़ रुपये की वसूली अगले साल में कम होगी। जिसे 3000 करोड़ के बजाय 4000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर पूरा करना पड़ेगा।
उम्मीद है कि नियामक आयोग हमें एफएसए के 2400 करोड़ रुपये और रेगुलेटरी असेट के 2400 करोड़ रुपये तय समय में वसूले का आदेश पारित करेगा। अगर एफएसए की वसूली दो के बजाय तीन साल में करने की अनुमति दी तो कंपनियों को ज्यादा कर्ज लेना पड़ेगा।
-देवेंद्र सिंह, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, उत्तर-दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम
वितरण कंपनियों ने महंगी बिजली खरीदने के तौर पर 2400 करोड़ रुपये और रेगुलेटरी असेट के लिए 2400 करोड़ रुपये की वसूली का आवेदन दे रखा है। आयोग ने सुनवाई पूरी कर ली है। कंपनियों की एआरआर पर दो दिन के भीतर आयोग अपना फैसला सुना देगा।
-आरएन पराशर, चेयरमैन, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग